BSP सुप्रीमो मायावती ने चुनाव सुधार बहस में कर दी ये 3 बड़ी मांग

Sandesh Wahak Digital Desk: संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर गरमागर्म चर्चा के बीच विपक्षी दलों ने मौजूदा SIR प्रक्रिया को लेकर सवालों की बौछार कर दी। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने भी चुनाव सुधार बहस में अपनी पार्टी की ओर से तीन अहम मांगें रखकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी। मायावती ने SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाने, आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों की जिम्मेदारी सीधे उन पर डालने और EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई। उन्होंने चुनाव आयोग के कई तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

SIR प्रक्रिया पर उठी आपत्ति

BSP सुप्रीमो ने कहा कि SIR प्रक्रिया पर BSP को आपत्ति नहीं है, लेकिन इसकी समय-सीमा बेहद कम रखी गई है, जिससे सबसे अधिक दबाव BLO पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में BLO अत्यधिक दबाव में काम कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह स्थिति और भी गंभीर है। करीब 15.40 करोड़ मतदाता वाले प्रदेश में जल्दबाज़ी में यह प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास अनेक वैध मतदाताओं को सूची से बाहर कर सकता है, खासकर गरीब और प्रवासी मजदूरों को जो रोज़गार के चलते अपने घर से बाहर रहते हैं। मायावती ने कहा कि मतदाता सूची से किसी का नाम छूट जाना बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकार से वंचित करना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जहां निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं हैं, वहां SIR की समय-सीमा बढ़ाना ही न्यायसंगत कदम होगा।

BSP

प्रत्याशियों की जिम्मेदारी पार्टी पर क्यों?

दूसरी मांग पर बोलते हुए मायावती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने नियम तय किए कि आपराधिक इतिहास वाले प्रत्याशी अपनी पूरी जानकारी हलफनामे में दें और उसे स्थानीय व राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित किया जाए। लेकिन अक्सर कई प्रत्याशी अपना पूर्ण आपराधिक इतिहास पार्टी को नहीं बताते, और कई बार यह तथ्य नामांकन की स्क्रूटनी के दौरान सामने आता है। मायावती का कहना है कि इससे अनावश्यक रूप से पार्टी पर बोझ और जिम्मेदारी आ जाती है। उन्होंने मांग रखी कि आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों से संबंधित सभी औपचारिकताएं और कानूनी जिम्मेदारियां उन्हीं पर डाली जाएं। अगर कोई प्रत्याशी जानकारी छुपाता है, तो सज़ा, कार्रवाई और जवाबदेही भी उसी की होनी चाहिए, न कि पार्टी की।

EVM पर भरोसा नहीं

मायावती ने चुनाव सुधार बहस में EVM पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया और कहा कि लगातार उठती गड़बड़ियों की शिकायतों के चलते जनता का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो रहा है। बीएसपी की मांग है कि देश में दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि तुरंत बैलेट पेपर लागू करना संभव नहीं है, तो कम से कम प्रत्येक बूथ पर VVPAT की पर्चियों की पूरी गिनती कराई जाए और उसे EVM के परिणाम से मिलाया जाए। मायावती ने चुनाव आयोग के इस तर्क को खारिज कर दिया कि इसमें अधिक समय लगता है। उन्होंने कहा कि मतदान की प्रक्रिया जब महीनों चल सकती है, तो गिनती में कुछ अतिरिक्त घंटे लगने से कोई नुकसान नहीं होगा। इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और चुनावी संदेहों पर विराम लगेगा, जो लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।

 

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