पेट में जलन, दर्द और खट्टी डकारें, कहीं आपमें भी तो नहीं दिख रहे इस खतरनाक बीमारी के लक्षण?
Sandesh Wahak Digital Desk: अल्सर (Ulcer) पेट या आंत की अंदरूनी परत में बनने वाला एक घाव होता है, जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। कई मामलों में इसके लक्षण शुरू में हल्के होते हैं, जिस वजह से लोग इसे सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। गलत खान-पान, लगातार तनाव और दवाओं का गलत तरीके से सेवन करने पर अल्सर गंभीर रूप ले सकता है। पेट में जलन, दर्द और खट्टी डकारें आना इसके सबसे आम लक्षणों में शामिल हैं। आयुर्वेद में अल्सर को पाचन अग्नि की गड़बड़ी से जोड़कर देखा जाता है और माना जाता है कि सही आहार व दिनचर्या से इसे ठीक किया जा सकता है।
अल्सर होने के मुख्य कारण
अल्सर (Ulcer) होने के पीछे सबसे बड़ा कारण गलत खान-पान माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बहुत ज्यादा तेल-मसालेदार और मिर्च वाला खाना खाता है तो पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से भी पेट में एसिड बढ़ जाता है, जिससे अल्सर बनने की आशंका रहती है। इसके अलावा लगातार तनाव, चिंता और मानसिक दबाव भी अल्सर (Ulcer) को जन्म दे सकते हैं। चाय, कॉफी, सिगरेट और शराब का अत्यधिक सेवन पेट की परत को कमजोर करता है। वहीं जो लोग छोटी-छोटी बातों पर बार-बार पेन किलर लेते हैं, उनमें भी अल्सर का खतरा बढ़ जाता है।

अल्सर में खाने-पीने का सही तरीका
अल्सर (Ulcer) होने पर सबसे जरूरी है हल्का और सिंपल भोजन करना। ऐसा खाना जो आसानी से पच जाए, पेट को आराम देता है और घाव भरने में मदद करता है। मूंगदाल, दलिया और सादा चावल पेट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। लौकी, कद्दू, तोरई और हरी सब्जियां भी पाचन को बेहतर बनाती हैं। पका हुआ केला और पपीता जैसे फल पेट की जलन को कम करने में सहायक होते हैं। एक साथ बहुत ज्यादा खाना खाने की बजाय दिन में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करना अल्सर के मरीजों के लिए बेहतर रहता है।
किन चीजों से परहेज जरूरी है
अल्सर (Ulcer) की स्थिति में तीखा और ज्यादा तेल-मसालेदार खाना पूरी तरह से नुकसानदायक हो सकता है। खट्टे फल, अचार और ज्यादा नमक वाली चीजें पेट में जलन बढ़ा सकती हैं। तली हुई चीजें पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, इसलिए इनसे बचना जरूरी है। चाय, कॉफी, सिगरेट और शराब का सेवन अल्सर को और गंभीर बना सकता है। इसके साथ ही बाहर का खाना और कोल्ड ड्रिंक पेट की परत को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए इनसे दूरी बनाना ही बेहतर होता है।

आयुर्वेद के अनुसार इलाज
आयुर्वेद में अल्सर (Ulcer) को पाचन अग्नि की कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है और इसका उपचार प्राकृतिक तरीकों से किया जाता है। सुबह खाली पेट मुलेठी चूर्ण का सेवन करने से पेट के घाव भरने में मदद मिलती है। दिन में एक से दो बार ठंडा दूध पीना पेट की जलन को शांत करता है। देसी गाय का आधा चम्मच घी भी पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेदिक इलाज के साथ-साथ मानसिक शांति भी बेहद जरूरी है, क्योंकि तनाव अल्सर को बढ़ाने का काम करता है। सही खान-पान, संयमित दिनचर्या और तनाव से दूरी बनाकर अल्सर से राहत पाई जा सकती है।
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