लखनऊ में जमीन और मकान खरीदना होगा और महंगा, 10 साल बाद डीएम सर्किल रेट में बड़ा बदलाव

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी वासियों के लिए अब जमीन, मकान या दुकान खरीदना पहले से ज्यादा महंगा साबित हो सकता है। करीब 10 साल बाद लखनऊ में डीएम सर्किल रेट में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे 1 अगस्त 2025 से लागू किया जाएगा। इस नए सर्किल रेट में कृषि भूमि, व्यावसायिक संपत्तियों और बहुमंजिला भवनों की कीमतों में 15% से 25% तक की बढ़ोतरी की गई है।

कहां-कहां कितनी बढ़ोतरी हुई?

  • कृषि भूमि पर: 15% तक
  • व्यावसायिक संपत्तियों पर: 25% तक
  • बहुमंजिला भवनों पर: 20% तक
  • दुकान, ऑफिस और गोदाम: औसतन 20%
  • कुछ लोकेशन पर: विसंगति दूर करते हुए दरें 40% तक बढ़ाई गई हैं

वास्तव में 2015 के पिछले सर्किल रेट में कुछ स्थानों पर दुकान, ऑफिस और गोदाम के रेट काफी कम थे, जिसे इस बार सुधारते हुए बराबरी पर लाया गया है।

नये रेट में क्या है खास?

अगर आप गैर-कृषि भूखंड या मकान खरीदने जा रहे हैं और उसके आसपास दुकानें या व्यवसायिक गतिविधियां हैं, तो अब आपको 20% ज्यादा कीमत चुकानी होगी। वहीं अगर कोई ऐसी जमीन बेचता है, तो उसका मूल्यांकन भी अब तय दर से 50% अधिक माना जाएगा। हालांकि कृषि भूमि पर लगे पेड़ों की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले जैसी दरें ही लागू रहेंगी।

सुझाव और आपत्तियों का मौका

जिन्हें इस नए प्रस्तावित सर्किल रेट को लेकर कोई सुझाव या आपत्ति है, वे 2 जुलाई से 17 जुलाई के बीच सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक अपने क्षेत्र के उपनिबंधक कार्यालय या सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय में आवेदन दे सकते हैं। इसके अलावा आप ई-मेल से भी राय भेज सकते हैं:

  • aiglko01@gmail.com
  • aiglko02@gmail.com

सभी आपत्तियों का निस्तारण 27 जुलाई 2025 तक कर दिया जाएगा।

जिलाधिकारी का क्या कहना है?

डीएम विशाख जी ने कहा कि बीते 10 वर्षों में लखनऊ में जबरदस्त विकास हुआ है। नई सड़कें बनी हैं, आवासीय कॉलोनियों का विस्तार हुआ है और बाज़ार भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में सर्किल रेट में संशोधन ज़रूरी हो गया था। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें रेट्स को लेकर कोई भी सुझाव या शिकायत हो, तो वे ईमेल या सीधे संबंधित कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

क्या है डीएम सर्किल रेट?

यह सरकार द्वारा तय किया गया वह न्यूनतम मूल्य होता है जिस पर कोई भी संपत्ति खरीद-बिक्री की जाती है। रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी भी इसी के आधार पर तय होती है। अगर आप लखनऊ में कोई जमीन, मकान या दुकान खरीदने की योजना बना रहे हैं तो 1 अगस्त से पहले का समय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि नई दरें लागू होने के बाद खरीदारी महंगी पड़ सकती है।

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