यूपी में जातिगत रैलियों पर प्रतिबंध, अखिलेश यादव बोले- 5000 सालों का भेदभाव कैसे मिटेगा?

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में जाति-आधारित राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक जातिगत प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रदर्शन ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ और ‘राष्ट्रीय एकता’ के लिए खतरा हैं। इस आदेश के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है।

अखिलेश यादव ने पूछा- 5000 सालों का भेदभाव कैसे मिटेगा?

सरकार के इस फैसले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए कई तीखे सवाल पूछे। उन्होंने लिखा, “5000 सालों से मन में बसे जातिगत भेदभाव को कैसे दूर किया जाएगा?”

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सिर्फ सार्वजनिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने से यह भेदभाव खत्म हो जाएगा? उन्होंने कहा कि किसी के घर धुलवाने की सोच, झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की मानसिकता और नाम से पहले जाति पूछने की आदत को कैसे खत्म किया जाएगा?

हाई कोर्ट के फैसले पर आधारित है आदेश

दरअसल, यूपी सरकार का यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के 16 सितंबर के एक आदेश पर आधारित है। हाई कोर्ट ने पुलिस को दस्तावेजों में जाति का विवरण दर्ज करना बंद करने का निर्देश दिया था, सिवाय उन मामलों के जहां यह कानूनी रूप से जरूरी हो। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक के उस तर्क की आलोचना भी की थी, जिसमें कहा गया था कि जाति का विवरण पुलिसिंग के लिए जरूरी है।

सरकार के इस नए नियम से समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी और अपना दल जैसी पार्टियों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ये पार्टियां अक्सर जातिगत समीकरणों के आधार पर जनसभाएं करती रही हैं।

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