पार्ट-टाइम नौकरी और निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वालों पर CBI का शिकंजा, सरगना CA गिरफ्तार
Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत 15 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह कार्रवाई ऑनलाइन धोखाधड़ी के उस बड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई है, जो दुबई स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म पाइपल (PYPL) का इस्तेमाल कर भारतीयों की मेहनत की कमाई विदेश भेज रहा था।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को घर बैठे मोटी कमाई और पार्ट-टाइम नौकरी का लालच देता था। शुरुआत में पीड़ितों से छोटी रकम निवेश कराई जाती थी और उन्हें फर्जी मुनाफा दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था। जैसे ही पीड़ित बड़ी रकम निवेश करता, जालसाज सारे संपर्क तोड़कर गायब हो जाते थे।
चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) निकला गिरोह का मास्टरमाइंड
इस पूरे खेल का सरगना दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर के बिजवासन गांव में रहने वाला चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा बताया जा रहा है। सीबीआई के मुताबिक, अशोक शर्मा ने फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का एक ऐसा मकड़जाल बुना था जिसके जरिए अकेले पिछले एक साल में 900 करोड़ रुपये की हेराफेरी किए जाने का संदेह है। अशोक शर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ठगी गई रकम को पकड़े जाने से बचाने के लिए गिरोह ने बेहद शातिर तरीका अपनाया था।
फर्जी कंपनियां: पैसों को 15 फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
विदेशी निकासी: अंतरराष्ट्रीय डेबिट कार्डों के जरिए विदेशी एटीएम से पैसे निकाले जाते थे।
क्रिप्टोकरेंसी: बड़ी रकम को भारत के वर्चुअल एक्सचेंजों के माध्यम से USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता था।
सीबीआई ने इस मामले में सितंबर 2025 से ही कार्रवाई शुरू कर दी थी, जिसके तहत कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया था। हालिया छापेमारी में भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं। जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ने कई आम लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उन्हें अनजाने में अपनी फर्जी कंपनियों का ‘डायरेक्टर’ बना रखा था।
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