UP News: सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सेवा विस्तार देने से केंद्र सरकार का परहेज
नौकरशाही के गलियारों में तलाशे जा रहे सियासी निहितार्थ, भाजपा शासित बाकी राज्यों पर बरती जा रही दरियादिली
Sandesh Wahak Digital Desk/ Manish Srivastava: ग़ैरों से कहा तुम ने ग़ैरों से सुना तुम ने, कुछ हम से कहा होता कुछ हम से सुना होता…किसी प्रख्यात शायर की इन पंक्तियों पर दिल्ली दरबार और यूपी सरकार बिलकुल मुफीद बैठती है।
कहने को यूपी में डबल इंजन सरकार है। इसके बावजूद केंद्र ने मुख्य सचिव के सेवा विस्तार के बहाने एक बार फिर यूपी सरकार को न बोलकर कई सवाल खड़े किये हैं। वहीं दूसरी तरफ बाकी भाजपा शासित राज्यों की सिफारिश पर मुख्य सचिवों को धड़ाधड़ सेवा विस्तार की हरी झंडी दिखाई जा रही है। प्रदेश की नौकरशाही के गलियारों में मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार न दिए जाने के सियासी सियासी निहितार्थ भी शिद्द्त से तलाशे जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के मुख्य सचिव को केंद्र ने दिया सेवा विस्तार
ताजा मामला छत्तीसगढ़ का है। जहां पिछले माह 30 जून को केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को तीन माह का सेवा विस्तार सरकार की अनुशंसा पर दिया है। छत्तीसगढ़ में भी भाजपा का ही शासन है। महाराष्ट्र में भी पिछले वर्ष मुख्य सचिव को केंद्र ने सेवा विस्तार से नवाजा था। वरिष्ठ आईएएस नितिन कऱीर को एक अप्रैल से 30 जून 2024 तक बतौर मुख्य सचिव तीन माह के सेवा विस्तार को हरी झंडी दिखाई गयी थी। महाराष्ट्र में भी भाजपा की सरकार है।

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी की संस्तुति पर भी एक मार्च 2024 को छह माह के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के सेवा विस्तार को केंद्र सरकार ने मंजूर किया था। पिछले साल ही केंद्र ने दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार को भी दूसरी बार तीन माह के लिए सेवा विस्तार दिया था। पहले नरेश नवंबर 2023 में रिटायर होने वाले थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विस्तार को हरी झंडी दिखा दी।

सबसे ज्यादा सुर्खियों में यूपी सरकार की प्रबल संस्तुति और पत्र के बावजूद मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार न दिया जाना है। हालांकि इससे पहले पूर्व आईएएस दुर्गा शंकर मिश्र को तीन बार नियमों के विपरीत सेवा विस्तार केंद्र सरकार ने दिया था। मिश्र को पीएम मोदी का ख़ास भी करार दिया जाता है।
यूपी के डीजीपी रहे प्रशांत कुमार को भी न, गुजरात को पीएम मोदी की हां
सिर्फ यूपी के मुख्य सचिव के मामले में ही सेवा विस्तार पर केंद्र सरकार ने ब्रेक नहीं लगाया है। इससे पहले डीजीपी के प्रकरण में भी केंद्र ने यूपी सरकार की उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया था। 31 मई को रिटायर हुए डीजीपी प्रशांत कुमार को सेवा विस्तार देने के लिए यूपी सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा था। इसके बावजूद केंद्र ने कोई हामी नहीं भरी। जबकि अगले माह 30 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली नियुक्ति समिति ने गुजरात के डीजीपी विकास सहाय को छह माह का सेवा विस्तार दिया है। ऐसे में सवाल उठने लाजिमी हैं।

आखिर क्यों : शिकायतें अपार, फिर भी थी सेवा विस्तार की दरकार
बीते कुछ वक्त से केंद्र सरकार के पास पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के खिलाफ आ रही शिकायतों का अम्बार खड़ा हो गया था। जिन्हे यूपी सरकार के पास निस्तारण के लिए भेजा गया था। मुख्य सचिव के खिलाफ शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी सीएम दफ्तर के कन्धों पर रहती है। इसके बावजूद यूपी सरकार ने बतौर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार देने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। जो केंद्र में बैठे तमाम जिम्मेदारों को नागवार गुजरने के साथ चर्चा का विषय भी बना था। इसको भी सेवा विस्तार ना दिये जाने का वाजिब कारण माना जा रहा है।
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