Fastag सालाना पास पर केंद्र का साफ रुख, कमर्शियल कैब-टैक्सी को नहीं मिलेगा लाभ

Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्र सरकार ने फास्टैग (Fastag) के सालाना पास को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा है कि ₹3000 का सालाना फास्टैग पास केवल निजी वाहनों के लिए लागू है और इसे कमर्शियल कैब या टैक्सी के लिए लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लोकसभा में इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी।

₹3000 में 200 बार टोल पार करने की सुविधा

केंद्र सरकार की तरफ से पिछले साल फास्टैग (Fastag) के लिए सालाना पास का विकल्प शुरू किया गया था। इस योजना के तहत ₹3000 में एक पास दिया जाता है, जिससे वाहन मालिक 200 बार टोल प्लाजा पार कर सकते हैं। इस योजना के लागू होने के बाद सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने लोकसभा में सवाल उठाया था कि क्या इसी तरह का पास कैब और टैक्सी के लिए भी लागू किया जाएगा। इस पर नितिन गडकरी ने साफ कहा कि यह सुविधा अभी सिर्फ निजी यानी नॉन-कमर्शियल वाहनों के लिए ही है और कमर्शियल टैक्सी या कैब एग्रीगेटर को इसमें शामिल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

सरकार ने यह भी बताया कि कमर्शियल वाहनों के लिए कुछ अन्य विकल्प पहले से मौजूद हैं। जिले में रजिस्टर्ड कमर्शियल वाहनों को कुछ छूट दी जाती है और नेशनल हाईवे का नियमित उपयोग करने वालों के लिए मंथली पास की सुविधा भी पहले से लागू है। लोकसभा में कमर्शियल टैक्सी ड्राइवरों से जुड़े टोल पास, टैक्स और ड्राइविंग घंटे से जुड़े सवालों पर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

एंट्री टैक्स और वाहन टैक्स पर राज्यों का अधिकार

एक राज्य से दूसरे राज्य में चलने वाली टैक्सियों पर लगने वाले एंट्री टैक्स को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। नितिन गडकरी ने कहा कि वाहन टैक्स और एंट्री टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों के पास है। इसलिए केंद्र सरकार इन टैक्स को पूरे देश में एक जैसा करने या किसी राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली को लागू करने का फैसला अपने स्तर पर नहीं कर सकती है।

सरकार ने टैक्सी ड्राइवरों की सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी है। मोटर व्हीकल्स एक्ट और मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट के तहत ड्राइवरों के लिए रोजाना 8 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे काम की सीमा तय की गई है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के 17 अप्रैल 2025 के निर्देशों के बाद राज्यों के श्रम और परिवहन सचिवों की एक समिति बनाई गई है। इस समिति ने ड्राइविंग घंटे की निगरानी, लंबी दूरी की यात्रा में दो ड्राइवर सिस्टम, थकान पहचानने वाली तकनीक और कमांड कंट्रोल सेंटर जैसे उपायों की सिफारिश की है।

 

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