जनसंख्या घटने से चीन बदल रहा है अपनी नीति, महिलाओं पर ज्यादा बच्चे पैदा करने का दबाव

Sandesh Wahak Digital Desk: एक ज़माने में वन चाइल्ड पॉलिसी के नाम पर महिलाओं को जबरन गर्भपात कराने वाला चीन अब अपनी ही नीति के उलट जा रहा है। अब सरकार महिलाओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील कर रही है। यह बदलाव देश में जनसंख्या की भारी गिरावट और आबादी के बुढ़ापे की तरफ बढ़ने की चिंता के चलते आया है।

आंकड़े बताते हैं डरावनी तस्वीर

चीन का जन्म आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर गिर गया है। 2025 में देश में सिर्फ 79.2 लाख बच्चे पैदा हुए, जो 2024 के 95.4 लाख से करीब 17% कम है। प्रति 1000 लोगों पर जन्म दर मात्र 5.63 रह गई है, जो 1949 के बाद से सबसे कम स्तर है।

म्यांमार स्थित मेकांग न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सरकार अब भी बच्चे पैदा करने को व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आर्थिक योजना का एक साधन मानती है। पहले ‘विकास और दबाव कम करने’ के नाम पर महिलाओं पर एक बच्चे की पाबंदी थोपी गई, अब आबादी बढ़ाने के नाम पर उन पर ज़्यादा बच्चे पैदा करने का दबाव डाला जा रहा है।

महिलाओं का संघर्ष अभी भी जारी

दिक्कत यह है कि जमीनी हकीकत अलग है। महिलाएं और युवा जोड़े बढ़ती महंगाई, करियर के दबाव, कामकाजी जगह पर भेदभाव और बच्चों की परवरिश की बढ़ी जिम्मेदारियों के चलते अधिक बच्चे पैदा करने से हिचक रहे हैं। इसके अलावा, पिछली नीतियों के कारण बच्चे पैदा करने लायक उम्र की महिलाओं की संख्या भी कम हो गई है।

क्या थी पुरानी नीति

1979: वन चाइल्ड पॉलिसी लागू, जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर कड़ी जबरदस्ती।

2016: टू चाइल्ड पॉलिसी अपनाई।

बाद में थ्री चाइल्ड पॉलिसी की अनुमति दी गई।

लेकिन इन सबके बावजूद जन्म दर लगातार गिरती जा रही है। रिपोर्ट कहती है कि चीन की नीति का भ्रम एक गहरी समस्या दिखाता है। सरकार ने आर्थिक मजबूरी के चलते अपनी नीति को थोपना शुरू कर दिया है, व्यक्तिगत इच्छा को बढ़ावा देने के बजाय। यानी, पहले जबरन कम बच्चे और अब जबरन ज्यादा बच्चे दोनों ही स्थितियों में नागरिकों की निजी पसंद को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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