चीन की नई चाल! तिब्बत से सटी सीमा पर रेलवे बनाकर भारत को घेरने की तैयारी
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत-चीन सीमा पर एक बार फिर खतरे की घंटी बज रही है। तिब्बती मामलों के विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि चीन, ऑपरेशन सिंदूर के बाद, अब भारत की पश्चिमी सीमाओं पर भी अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज़ी से बढ़ा रहा है।
तिब्बत में बन रही है रणनीतिक रेलवे लाइन
चीन ने तिब्बत में जिस नई रेलवे परियोजना पर काम शुरू किया है, उसे केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट समझना भूल होगी। यह रेलवे लाइन न केवल चीन के लिए सामरिक रूप से बेहद अहम है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रेलवे लाइन एलएसी के पश्चिमी सेक्टर यानी लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड से सटी सीमा के बेहद करीब बनाई जा रही है। इससे चीन की सेना को सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से तैनात होने की क्षमता मिल जाएगी।
5000 किमी का रेल नेटवर्क — लक्ष्य 2035
चीन की योजना है कि वह तिब्बत के कठिन भौगोलिक इलाकों में 2035 तक करीब 5,000 किलोमीटर का रेल नेटवर्क तैयार कर ले। इस नई परियोजना की रफ्तार भी चिंताजनक है — जानकारों का मानना है कि चीन इसे महज 5 साल में पूरा कर सकता है।
त्सेवांग दोर्जी की चेतावनी
तिब्बत पॉलिसी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता त्सेवांग दोर्जी ने कहा है कि ये रेलवे और हाइवे प्रोजेक्ट सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये चीन की बड़ी सैन्य रणनीति से जुड़े हुए हैं।
“चीन पहले ही अरुणाचल प्रदेश के पास जल संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित कर चुका है। अब वह पश्चिमी सेक्टर में सैन्य गतिशीलता बढ़ाने की कोशिश में है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद वह चौकन्ना हो गया है और उसी के तहत यह सब हो रहा है।” — त्सेवांग दोर्जी
भारत के लिए क्या है खतरा?
- सेना की तेज़ आवाजाही: रेलवे लाइन से चीन अपनी सेना और हथियारों को सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचा सकता है।
- निगरानी और जासूसी: नई कनेक्टिविटी चीन को सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने का मौका देगी।
- मल्टी-फ्रंट दबाव: पूर्वी सेक्टर (अरुणाचल) के बाद अब पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड) पर भी दबाव बढ़ेगा।
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