पतले लोगों का भी बढ़ सकता है Cholesterol
Sandesh Wahak Digital Desk: आज के समय में बढ़ता कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) एक आम स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि अगर उनका वजन कम है तो उन्हें कोलेस्ट्रॉल की चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) शरीर में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट होता है, जो सेल्स के निर्माण और कुछ जरूरी हॉर्मोन बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि जब इसका स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह हार्ट और ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि केवल शरीर का वजन ही कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) का पैमाना नहीं होता। कम वजन वाले लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इसलिए हर व्यक्ति के लिए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी होता है।
पतले लोगों को भी Cholesterol
जानकार मानते है कि, पतले या सामान्य वजन वाले लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) का स्तर बढ़ सकता है। वहीं कई लोग यह मानते हैं कि केवल मोटे लोगों को ही कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।
दरअसल शरीर का वजन सामान्य होने के बावजूद खराब खानपान और गलत लाइफस्टाइल के कारण कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) बढ़ सकता है। वहीं ज्यादा तली-भुनी चीजें, प्रोसेस्ड फूड, मीठी चीजें और शारीरिक एक्टिविटी की कमी इसके जोखिम को बढ़ा सकती है।
इसके अलावा जेनेटिक कारण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। असल में अगर परिवार में पहले से किसी को हाई कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) की समस्या रही हो, तो पतले लोगों में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों में शरीर का मेटाबॉलिज्म या फैट को संभालने की प्रक्रिया अलग तरीके से काम करती है। ऐसी स्थिति में वजन सामान्य होने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है। इसलिए केवल शरीर के वजन को देखकर कोलेस्ट्रॉल की स्थिति का अनुमान लगाना सही नहीं माना जाता।
हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण
असल में हाई कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि कई लोगों को लंबे समय तक इसका पता नहीं चल पाता। हालांकि जब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक बढ़ जाता है, तो इसका असर शरीर पर दिखने लगता है। कुछ लोगों को सीने में दर्द, जल्दी थकान या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
इसके अलावा कुछ मामलों में पैरों में दर्द या भारीपन की शिकायत भी सामने आती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि ये लक्षण केवल कोलेस्ट्रॉल से ही जुड़े हों, क्योंकि कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी ऐसा महसूस हो सकता है। इसलिए सही जानकारी के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी माना जाता है। वहीं समय पर जांच से कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) के स्तर के बारे में पता लगाया जा सकता है।
कैसे करें बचाव?
दरअसल कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को संतुलित रखने के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाना सबसे जरूरी माना जाता है। ऐसे में डाइट में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं तली-भुनी और प्रोसेस्ड चीजों का सेवन कम करना चाहिए। इसके साथ ही नियमित रूप से व्यायाम या किसी भी तरह की शारीरिक एक्टिविटी करना जरूरी होता है, क्योंकि इससे शरीर एक्टिव रहता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम करता है।
वहीं वजन सामान्य होने के बावजूद स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखना जरूरी है। साथ ही धूम्रपान और शराब के अधिक सेवन से बचना भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) की जांच कराना भी जरूरी है, ताकि किसी भी समस्या का पता समय रहते लगाया जा सके और जरूरी कदम उठाए जा सकें।
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