CM योगी की सख्ती दरकिनार, यूपी में झलक रहा करोड़ों की नई सड़कों में भ्रष्टाचार
Sandesh Wahak Digital Desk: पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों को घटिया सडक़ें बनाना ज्यादा लुभाता है। कमीशन के तारकोल से तैयार सडक़ों का चंद दिनों में उखडऩा और पहली बारिश न झेल पाना भ्रष्टाचार की तरफ इशारा है।

पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के निलंबन से भी नहीं सुधरे हालात
सीएम योगी ने पांच वर्ष के लिए सडक़ों के रखरखाव का आदेश देकर इंजीनियरों को घटिया निर्माण पर निलंबित भी किया है। पर हालात नहीं सुधरे। घटिया सडक़ें आए दिन लोगों को मौत बांट रही हैं। बुलंदशहर के अनूपशहर-शिकारपुर मार्ग को 30 करोड़ की लागत से तैयार किया गया। मंगलवार को ग्रामीणों ने घटिया साम्रग्री का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों ने आरोप खारिज कर दिए। ये पहला वाकया नहीं है।

चंद दिनों पहले हरदोई में 75 करोड़ की लागत से बनी सडक़ भाजपा विधायक के हाथ लगाते ही उखडऩे लगी। निर्माण दो माह पहले हुआ था। आगरा में तकरीबन 3500 करोड़ की सडक़ें बनी हैं। पांच वर्षों में 75 सडक़ों के निर्माण/अनुरक्षण में 112 करोड़ फूंके गए। सडक़ों के गड्ढों से निजात नहीं मिली। जुलाई में बुलंदशहर में मुख्य बाईपास रोड निर्माण के दौरान धंसने लगी थी। 57 करोड़ की लागत से रोड को फोर लेन का किया जा रहा था।

मंत्री-विधायक तक पकड़ रहे घटिया निर्माण
बलिया के बांसडीह में भी आठ करोड़ की सडक़ में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा था। पिछले साल आई रिपोर्ट के मुताबिक सौ करोड़ की सडक़ों के नमूने जांच में फेल हुए थे। हरदोई में 16 इंजीनियर निलंबित हुए। लखनऊ में बारिश ने 500 सडक़ों की पोल खोल दी। लोहिया पथ की करोड़ों की सडक़ का घटिया निर्माण भी बेनकाब हो गया। लखनऊ में लगातार नई बनी सडक़ें धंस रही हैं।

अलीगढ में मंत्री संदीप सिंह के घर के सामने स्मार्ट सिटी योजना के तहत 12 करोड़ से बन रही सडक़ और नाले के निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोपों पर शासन ने जांच समिति तक गठित की। मुजफ्फरनगर में मंत्री कपिल अग्रवाल ने 30 साल बाद बन रही करीब पौने चार करोड़ की सडक़ में घटिया गुणवत्ता का खेल अपनी आंखों से देखा था। उत्तर प्रदेशर मे ंसडक़ों के निर्माण में संगठित भ्रष्टाचार के खेल की जड़ें बेहद गहरी हैं।
प्रमुख सचिव ने दो अफसरों से मांगा स्पष्टीकरण
बरेली क्षेत्र के तहत बदायूं में करोड़ों की दो सडक़ों में जांच में गड़बडिय़ां मिली हैं। बाद में कमियां दूर करने के लिए कराए गए कार्य का परीक्षण भी नहीं किया गया। मंगलवार को प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी अजय चौहान ने बरेली क्षेत्र के मुख्य अभियंता अजय कुमार और अधीक्षण अभियंता बदायूं-पीलीभीत वृत्त कैलाश कुमार सिंह से 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पिछले साल नवंबर में शासन से टीमें जिलों में भेजी गई थीं। गिट्टी की साइज और निर्माण सामग्री के अनुपात के साथ ही बिटुमिन की मात्रा कम पाई गई।

कहां खर्च होता है गड्ढा मुक्त अभियान का बजट?
15 दिन पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने सडक़ों के गड्ढामुक्त अभियान के संबंध में समीक्षा बैठक की थी। त्यौहार से पहले सडक़ों को सुधारने के निर्देश दिए। प्रदेश में 432989 किमी लम्बी 678301 सडक़ें हैं। इनमें 44196 सडक़ों को गड्ढामुक्त किया जाना है। 2750 सडक़ों की विशेष मरम्मत होनी है। इसके लिए अरबों का बजट है। कई वर्षों से सडक़ों को गड्ढामुक्त करने के नाम पर भारी बजट खर्च हो रहा है। इसके बावजूद सडक़ों पर गड्ढा बरकरार रहना संगठित भ्रष्टाचार दिखाता है। जिसकी जांच न सिर्फ जरुरी है बल्कि पीडब्ल्यूडी के बड़े अफसरों पर कार्रवाई से सख्ती का संदेश नीचे तक जाएगा।
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