सीएम योगी का ‘मिशन सिंगापुर-जापान’ बना कर्मयोग की मिसाल, 4 दिन, 2 देश और 4 लाख करोड़ का निवेश
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर अपने कड़े अनुशासन और अथक ऊर्जा के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके हालिया सिंगापुर और जापान दौरे ने इस धारणा को और पुख्ता कर दिया है। चार दिनों की इस सघन विदेश यात्रा में मुख्यमंत्री ने जिस तरह समय के अंतर (Time Zone) और लंबी हवाई यात्राओं की थकान को दरकिनार कर बैक-टू-बैक बैठकें कीं, वह किसी मिसाल से कम नहीं है।
नींद पर भारी पड़ा ‘यूपी के विकास’ का संकल्प
सिंगापुर और जापान का समय भारत से क्रमश: ढाई और साढ़े तीन घंटे आगे है। लंबी उड़ानों के बाद शरीर को आराम की जरूरत होती है, लेकिन सीएम योगी का शेड्यूल कुछ और ही था।
सुबह 6 बजे सिंगापुर लैंड करने के महज ढाई घंटे बाद ही वे बैठकों में व्यस्त हो गए। सुबह से रात 10 बजे तक उद्योगपतियों के साथ चर्चा का सिलसिला चलता रहा। दूसरे दिन रात 8:30 बजे तक सिंगापुर का मिशन पूरा कर वे आराम करने के बजाय सीधे टोक्यो (जापान) के लिए रवाना हो गए।
घंटों की उड़ान के बाद सुबह 6 बजे टोक्यो पहुंचे और सुबह 9:15 बजे से ही बड़ी कंपनियों के डेलिगेशन के साथ मेज पर मौजूद थे। 27 फरवरी की सुबह जब वे वापस लखनऊ लौटे, तो उनके चेहरे पर थकान के बजाय संतोष के भाव थे।
न कोई सैर-सपाटा, न कोई औपचारिक भेंट
अमूमन राजनेताओं के विदेश दौरों में दर्शनीय स्थलों का भ्रमण और औपचारिक शिष्टाचार शामिल होता है, लेकिन सीएम योगी की इस यात्रा में ऐसा कुछ नहीं था। उनका पूरा समय ‘मिनट-टू-मिनट’ बैठकों, रोड शो और औद्योगिक इकाइयों के भ्रमण में बीता। इस मेहनत का नतीजा यह रहा कि यूपी के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू और 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरने के लिए तैयार हैं।
सादगी और आधुनिक विजन का संगम
मुख्यमंत्री की यह जीवनशैली केवल विदेश तक सीमित नहीं है। लखनऊ हो या गोरखपुर, उनकी दिनचर्या तड़के समाचार पत्रों के विश्लेषण से शुरू होती है, जिसके बाद जनता दर्शन में आम लोगों की फरियाद सुनना और फिर देर रात तक फाइलों का निस्तारण करना उनकी आदत बन चुकी है।
अधिकारियों का कहना है कि सीएम योगी की सादगीपूर्ण जीवनशैली और विकास के प्रति उनके आधुनिक दृष्टिकोण ने ही वैश्विक मंच पर उत्तर प्रदेश की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। आज दुनिया के बड़े निवेशक यूपी को केवल एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि ‘इन्वेस्टमेंट हब’ के रूप में देख रहे हैं।
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