गणतंत्र दिवस पर कर्नल Sofia Quraishi को मिला विशिष्ट सेवा पदक
Sandesh Wahak Digital Desk: साल 2025 में पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वैश्विक मंच पर भारतीय पक्ष का सशक्त चेहरा रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी (Sofia Quraishi) को 2026 की गणतंत्र दिवस सम्मान सूची में विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाने वाला यह सम्मान उनके सैन्य करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
वीरता पुरस्कारों की घोषणा
यहां 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 70 सशस्त्र बल कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी। इन पुरस्कारों में छह मरणोपरांत सम्मान भी शामिल हैं, जो देश की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों की वीरता को दर्शाते हैं।
राष्ट्रपति द्वारा सशस्त्र बलों और अन्य कर्मियों को कुल 301 सैन्य पदक देने की भी स्वीकृति दी गई है। इनमें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, सेना पदक विशिष्ट, नौसेना पदक विशिष्ट, वायु सेना पदक प्रतिष्ठित और बड़ी संख्या में विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं। यह सूची भारतीय सेना की व्यापक और बहुआयामी सेवाओं को रेखांकित करती है।
Sofia Quraishi का सैन्य सफर
दरअसल कर्नल सोफिया कुरैशी (Sofia Quraishi) 2016 में उस समय चर्चा में आईं जब वह बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। आसियान प्लस देशों की भागीदारी वाले विशाल सैन्य अभ्यास एक्सरसाइज फोर्स 18 में उन्होंने मानवीय खदान कार्रवाई पर केंद्रित 40 सदस्यीय टुकड़ी का नेतृत्व किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सैन्य क्षमता को मजबूती से प्रस्तुत किया।
दरअसल साल 1974 में गुजरात के वडोदरा में जन्मीं कर्नल कुरैशी (Sofia Quraishi) एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने 1997 में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। राज्य सरकार के एक बयान के अनुसार उनके दादा सेना में धार्मिक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे चुके थे, जिससे सैन्य सेवा उनके परिवार की विरासत रही है।
ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से कमीशन
आपको बताते चलें कि, कर्नल सोफिया कुरैशी (Sofia Quraishi) ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से कमीशन प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें स्ट्रैटेजिक स्ट्रेटेजी और सिग्नल इंटेलिजेंस में असाधारण प्रदर्शन के लिए जाना गया। अपने शांत स्वभाव और सटीक संचार शैली के कारण वह विशेष रूप से प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रभावशाली रहीं, जहां उन्होंने भारतीय वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाई।
ऑपरेशन सिंदूर और पराक्रम में अहम भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी के प्रारंभिक बयान के पश्चात कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने सैन्य कार्रवाई के तरीके और रणनीति का विवरण साझा किया। इससे पहले दिसंबर 2001 में संसद हमले के बाद पंजाब सीमा पर चले ऑपरेशन पराक्रम में भी कर्नल कुरैशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी अनुकरणीय सेवाओं के लिए उन्हें जीओसी इन सी से प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।
पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ राहत अभियानों के दौरान उनके नेतृत्व और संचार कौशल की सराहना की गई, जिसके लिए उन्हें सिग्नल ऑफिसर इन चीफ से भी प्रशस्ति पत्र मिला। संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों के तहत उन्होंने 2006 से छह वर्षों तक कांगो में सेवाएं दीं। कर्नल कुरैशी के अनुसार संघर्ष क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयास उनके जीवन के सबसे गर्वपूर्ण क्षणों में शामिल हैं।
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