केंद्र के नए कानून के खिलाफ कांग्रेस करेगी राष्ट्रव्यापी आंदोलन, 10 जनवरी से सड़क पर उतरेंगे कार्यकर्ता

Sandesh Wahak Digital Desk: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने मनरेगा (MGNREGA) के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नया विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम असल में ग्रामीण रोजगार और गरीबों की आजीविका को खत्म करने की एक साजिश है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश इकाइयों को पत्र लिखकर आंदोलन की रूपरेखा भेज दी है।

केसी वेणुगोपाल के अनुसार, 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लाया गया मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि एक ‘वैधानिक गारंटी’ है। कांग्रेस ने नए कानून में निम्नलिखित बदलावों को खतरनाक बताया है।

गारंटी का खात्मा: नए कानून से काम पाने का कानूनी अधिकार और 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलने का प्रावधान कमजोर हो जाएगा।

राज्यों पर बोझ: केंद्र का मजदूरी योगदान 90% से घटाकर 60% करने का प्रस्ताव है, जिससे राज्यों और मजदूरों पर आर्थिक संकट बढ़ेगा।

पंचायतों की अनदेखी: फैसलों का केंद्रीकरण दिल्ली से होगा, जिससे ग्राम सभाओं की शक्ति कम हो जाएगी।

नाम बदलना: महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाना ‘श्रम की गरिमा’ और बापू के ‘ग्राम स्वराज’ के मूल्यों का अपमान है।

महिलाओं और वंचितों की रीढ़ पर हमला

कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा से हर साल करीब 6 करोड़ परिवारों को सीधा लाभ मिलता है, जिसमें 60% हिस्सेदारी महिलाओं की है। इस योजना ने गांवों से पलायन रोका है और ग्रामीण मजदूरी में सुधार किया है। नए कानून के आने से ग्रामीण भारत में भारी आर्थिक अस्थिरता पैदा होने की आशंका है।

आंदोलन का पूरा शेड्यूल

कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले के अनुसार, यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा।

10 जनवरी: सभी जिला मुख्यालयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की औपचारिक शुरुआत।

11 जनवरी: जिला स्तर पर एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध।

12 से 29 जनवरी: पंचायत स्तर पर चौपालें, नुक्कड़ सभाएं और जनसंपर्क अभियान।

30 जनवरी: वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना।

31 जनवरी से 6 फरवरी: जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव और ज्ञापन सौंपना।

7 से 15 फरवरी: राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव।

16 से 25 फरवरी: एआईसीसी द्वारा देशभर में चार बड़ी क्षेत्रीय रैलियों का आयोजन।

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