कथावाचक को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने पर बवाल, कांग्रेस ने की बहराइच एसपी को निलंबित करने की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: बहराइच के पुलिस अधीक्षक (SP) आर.एन. सिंह द्वारा कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी) देने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने इस कृत्य को संविधान की अवमानना बताते हुए एसपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कृत्य पुलिस की धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल करने वाला है।
कांग्रेस के मुख्य आरोप और तर्क
शाहनवाज आलम ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस और सेना संविधान के तहत संचालित बल हैं। नियमानुसार, ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ केवल संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को ही दिया जा सकता है। किसी निजी व्यक्ति या धर्मगुरु को ऐसी सलामी देना प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है।
इसके साथ ही एसपी के उस बयान पर भी सवाल उठाए गए जिसमें उन्होंने कहा था कि कथावाचक को जवानों के मानसिक तनाव और अवसाद दूर करने के लिए बुलाया गया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि तनाव दूर करने के लिए मनोचिकित्सकों (Psychiatrists) को बुलाया जाना चाहिए था, न कि किसी कथावाचक को।
शाहनवाज आलम ने कहा कि पुलिस एक धर्मनिरपेक्ष बल है, लेकिन एसपी की इस कार्रवाई ने उसे एक विशिष्ट धार्मिक सैन्य बल की तरह पेश किया है, जो खतरनाक संकेत है।
आर्थिक दंड और वसूली की मांग
कांग्रेस सचिव ने मांग की कि यदि इस कार्यक्रम के लिए कथावाचक को सरकारी खजाने से कोई भुगतान किया गया है, तो उसकी रिकवरी की जाए। साथ ही, कार्यक्रम पर हुए पूरे खर्च की भरपाई एसपी आर.एन. सिंह के वेतन से की जानी चाहिए।
डीजीपी की कार्रवाई पर सवाल
शाहनवाज आलम ने प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्णा द्वारा एसपी को तलब किए जाने की कार्रवाई को भी ‘नरम’ बताया। उन्होंने कहा कि डीजीपी ने इसे केवल “परेड ग्राउंड के अनाधिकृत उपयोग” का तकनीकी मुद्दा बनाकर अपराध को कम करने (Dilute) की कोशिश की है, जबकि यह सीधे तौर पर संविधान विरोधी कृत्य है।
“योगी सरकार पुलिस अधिकारियों के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। ऐसे अधिकारी पुलिस विभाग में रहने योग्य नहीं हैं जो वर्दी को किसी निजी विचार का औजार बना लें।”
शाहनवाज आलम, राष्ट्रीय सचिव, कांग्रेस

