लखनऊ में संविधान के सहारे कांग्रेस, ‘आई लव कॉन्स्टिट्यूशन’ होर्डिंग से भाजपा और सपा के ‘पोस्टर वार’ में एंट्री
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर से शुरू हुआ विवाद अब एक पूर्ण पोस्टर वार में बदल गया है, जिसने प्रदेश के तीन प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, सपा और कांग्रेस को आमने-सामने ला दिया है। यह पोस्टरबाजी अब महज़ व्यक्तिगत समर्थन तक सीमित न रहकर संवैधानिक मूल्यों और राजनीतिक विचारधारा के टकराव का मैदान बन गई है।
कहां से शुरू हुआ पोस्टर विवाद
इस पोस्टर वार की शुरुआत कुछ समय पहले कानपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर लगाए जाने से हुई थी। इन पोस्टर को लेकर पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने के आरोप लगे, जिसके बाद यह विवाद लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में फैल गया।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में बरेली में प्रदर्शन हुआ, जिसने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, जहां पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ बरेली पुलिस ने सख्त कार्रवाई कर माहौल शांत कराया।
पोस्टर वार का राजनीतिक रंग
बरेली में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर के जरिए पलटवार शुरू हुआ।
बरेली पुलिस की कार्रवाई के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने लखनऊ की सड़कों पर ‘आई लव योगी’ और ‘आई लव बुलडोजर’ के होर्डिंग लगवाए। ये होर्डिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और सख्ती को रेखांकित कर रहे थे।
भाजपा के इस कदम के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता भी इस वार में कूद पड़े। सपा नेताओं ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के समर्थन में ‘आई लव अखिलेश’ के होर्डिंग लगवाए।
अब कांग्रेस पार्टी भी इसमें शामिल हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य अब्दुल्लाह शेरखान ने पार्टी कार्यालय के बाहर एक बड़ी होर्डिंग लगवाई है, जिस पर ‘आई लव कॉन्स्टिट्यूशन’ लिखा है।
इस होर्डिंग में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक बड़ी तस्वीर है, जिसमें वह संविधान की प्रति हाथ में लिए हुए हैं। उनके साथ पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और प्रदेश के अन्य वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें भी हैं। कांग्रेस के इस कदम को राजनीतिक संघर्ष को संवैधानिक मूल्यों की ओर मोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
यह पोस्टर वार अब केवल प्रचार माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच चल रही वैचारिक लड़ाई को भी उजागर कर रहा है।
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