संविधान पार्क विवाद: ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द हटाने पर भड़की कांग्रेस, शाहनवाज आलम ने कही ये बात
Sandesh Wahak Digital Desk: बागपत के बड़ौत में नवनिर्मित संविधान पार्क में लगी प्रस्तावना की प्रतिलिपि से ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द हटाए जाने पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने इसे सीधे तौर पर संविधान का अपमान और एक ‘आपराधिक कृत्य’ करार दिया है।
DM, मंत्री और चेयरमैन पर केस की तैयारी
कांग्रेस नेताओं ने बागपत प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रस्तावना में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो पार्क का उद्घाटन करने वाली DM अस्मिता लाल, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री केपी मलिक और बड़ौत नगरपालिका चेयरमैन अश्वनी तोमर के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोला जाएगा। शाहनवाज आलम ने कहा कि यह मामला ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ की धारा 2 के तहत आता है, जिसमें 3 साल की सजा का प्रावधान है।
DM के ‘मौलिक प्रति’ वाले तर्क को कांग्रेस ने नकारा
कांग्रेस ने DM अस्मिता लाल के उस बयान को भ्रामक बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्क में लगी प्रस्तावना ‘संविधान की मौलिक प्रति’ पर आधारित है। शाहनवाज आलम ने तीन कानूनी दलीलें पेश कीं।
केशवानंद भारती केस (1973): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
42वां संशोधन (1976): इसी संशोधन के जरिए ये दोनों शब्द प्रस्तावना का हिस्सा बने थे और आज भी संवैधानिक रूप से अनिवार्य हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (27 नवंबर 2024): हाल ही में अदालत ने इन शब्दों को हटाने वाली याचिका खारिज कर दी थी, जिससे इनकी स्थिति और मजबूत हुई है।
हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने साफ किया कि यदि प्रशासन अपनी गलती नहीं सुधारता, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष लव कश्यप, शहर अध्यक्ष राम हरि पवार और पूर्व मंत्री ओमवीर तोमर सहित कई दिग्गज नेता शामिल रहे।
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