UGC की नई गाइडलाइंस पर बढ़ा विवाद, कुमार विश्वाश ने भी जताया विरोध

Sandesh Wahak Digital Desk: UGC की नई गाइडलाइंस को लेकर देशभर में विवाद जारी है। इसी बीच मशहूर कवि कुमार विश्वास का बयान सामने आया है, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया है। कुमार विश्वास ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दिवंगत रमेश रंजन मिश्रा की कविता पोस्ट की और इसके जरिए यूजीसी नियमों पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।

कविता के जरिए कुमार विश्वास का विरोध

कुमार विश्वास ने अपनी पोस्ट में लिखा, मैं अभागा सवर्ण हूं, रौंया रौंया उखाड़ लो राजा। इसके साथ उन्होंने कविता की पंक्तियां भी साझा कीं, चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूं मेरा, रौंया रौंया उखाड़ लो राजा। कुमार विश्वास ने अपनी पोस्ट के साथ UGC RollBack हैशटेग का इस्तेमाल किया। इससे पहले भी वह इस मुद्दे पर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख चुके हैं।

शंकराचार्य विवाद पर भी दे चुके हैं बयान

दरअसल कुमार विश्वास ने इससे पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि भाषाएं संवाद का माध्यम होती हैं, विरोध का नहीं। उन्होंने यह भी कहा था कि एक सामान्य आस्तिक होने के नाते वह पूज्य शंकराचार्य जी के प्रति केवल श्रद्धा रखते हैं और किसी भी पक्ष द्वारा की गई भूल के लिए क्षमा प्रार्थी हैं।

क्या है UGC का विवाद?

दरअसल उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में कई प्रावधान किए गए हैं। इन नियमों के तहत विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान करना है। हालांकि कुछ लोग और संगठन इन नियमों का विरोध कर रहे हैं, जिसके चलते यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

UGC

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा

वहीं UGC नियम 2026 को लेकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दे दिया था। बाद में सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला था। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपने पदों से इस्तीफा देने और समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि सामान्य श्रेणी के लोग दोनों सरकारों से लगातार दूरी बना रहे हैं।

जिसके बाद सोमवार देर रात जारी आदेश के अनुसार अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया। निलंबन के साथ ही उन्हें जिलाधिकारी शामली के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार के नियुक्ति अनुभाग सात से विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग के हस्ताक्षर से जारी किया गया।

जांच के लिए आयुक्त नियुक्त

वहीं UGC विरोध के बाद सरकारी आदेश में कहा गया है कि अलंकार अग्निहोत्री ने प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता की है, जिसके चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। साथ ही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए बरेली मंडल के आयुक्त बीएस चौधरी को पदेन जांच अधिकारी नामित किया गया है।

 

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