‘ठांय-ठांय’ पर कोर्ट का एक्शन, मथुरा में 15 पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे एनकाउंटरों की विश्वसनीयता पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता है। इसी क्रम में मथुरा में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक कथित फर्जी मुठभेड़ को लेकर न्यायिक कार्रवाई हुई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल थाना प्रभारी, एसओजी प्रभारी समेत 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला फरह थाना क्षेत्र के ग्राम कोह के ग्राम प्रधान हरेन्द्र सिंह से जुड़ा है।
घटनाक्रम
24 फरवरी 2025 की तड़के 4:43 बजे सादाबाद कोतवाली प्रभारी और हाथरस एसओजी (SOG) टीम ने थाना फरह क्षेत्र के ग्राम कोह स्थित ग्राम प्रधान हरेन्द्र के घर पर दबिश दी थी। पुलिस हरेन्द्र को अपने साथ सादाबाद ले गई।
अगले दिन, यानी 25 फरवरी 2025 को, पुलिस ने ग्राम प्रधान हरेन्द्र सहित चार लोगों को बिसावर पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार दर्शाते हुए लूट के मामले में जेल भेज दिया था। ग्राम प्रधान हरेन्द्र ने बताया कि उनके साथ फरह के ग्राम रहीमपुर निवासी केशव और ग्राम गढ़ाया निवासी भोला तथा एक अन्य व्यक्ति को भी लूट के झूठे मामले में जेल भेजा गया था। उन्हें करीब 12 दिन बाद अदालत से जमानत मिल पाई थी।
न्यायिक कार्रवाई और पुलिस पर आरोप
ग्राम प्रधान हरेन्द्र सिंह ने बताया कि हाथरस पुलिस ने जिस दिन उन्हें घर से उठाया था, उसी दिन उनके पिता गजेन्द्र सिंह ने सीजेएम की अदालत में हाथरस पुलिस के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराने के लिए याचिका दाखिल कर दी थी।
हरेन्द्र के अधिवक्ता प्रेम सिंह चौहान ने जानकारी दी कि सीजेएम की अदालत ने 27 नवंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए तत्कालीन सादाबाद कोतवाली प्रभारी, एसओजी प्रभारी सहित 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, अदालत का आदेश फरह थाने पहुंच चुका है, लेकिन मामला विभागीय होने की वजह से फरह पुलिस इस आदेश पर मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।
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