UP में ‘स्मार्ट’ होंगी गौशालाएं: 12.39 लाख गोवंश के लिए बनेंगे ‘भूसा बैंक’, उत्कृष्ट सेवा करने वाले होंगे सम्मानित

Sandesh Wahak Digital Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर गो-संरक्षण की स्थिति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की गोशालाओं को न केवल सुरक्षित बनाया जाए, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के मॉडल पर काम किया जाए। इस दौरान उन्होंने गो-सेवा में समर्पित व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का भी निर्णय लिया।

प्रमुख निर्देश और नई व्यवस्थाएं

  • सीसीटीवी (CCTV) से निगरानी: प्रदेश के सभी गो-आश्रय स्थलों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। वर्तमान में 74 जनपदों के 5,446 स्थलों पर 7,592 कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी मॉनिटरिंग के लिए 52 जनपदों में कमांड एंड कंट्रोल रूम सक्रिय हैं।

  • भूसा बैंक की स्थापना: प्रत्येक गोशाला का अपना ‘भूसा बैंक’ होगा। सीएम ने गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों को मंडलवार भ्रमण कर इसकी प्रगति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

  • आत्मनिर्भरता का मॉडल: गोबर गैस संयंत्र (वर्तमान में 97 संचालित), गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट और गो-दीप जैसे उत्पादों के माध्यम से आय सृजन पर जोर दिया गया। मुजफ्फरनगर के ‘गो-अभयारण्य’ को इस दिशा में रोल मॉडल बताया गया।

यूपी में गो-संरक्षण: ताजा आंकड़े

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण की स्थिति इस प्रकार है:

श्रेणी केंद्रों की संख्या संरक्षित गोवंश
कुल गो-आश्रय स्थल 7,527 12.39 लाख+
अस्थायी गो-आश्रय स्थल 6,433 9.89 लाख
वृहद गो-संरक्षण केंद्र 518 1.58 लाख
कान्हा गो-आश्रय 323 77,925
कांजी हाउस 253 13,576
  • मुख्यमंत्री सहभागिता योजना: इसके तहत 1.14 लाख लाभार्थियों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं।

चारा और भूमि प्रबंधन

गोचर भूमि के प्रभावी उपयोग के लिए प्रदेश में 61,118 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। इसमें से 10,641 हेक्टेयर को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ा जा चुका है और 7,364 हेक्टेयर पर हरे चारे का विकास किया गया है। सीएम ने किसानों के साथ समन्वय कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने की बात कही।

सम्मान की घोषणा

मुख्यमंत्री ने कहा कि गो-सेवा भारतीय संस्कृति का अटूट हिस्सा है। गो-रक्षा एवं गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

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