सीपी राधाकृष्णन बने देश के 17वें उपराष्ट्रपति, NDA को मिला विपक्षी खेमे से भी ‘सरप्राइज’ समर्थन
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत को अपना नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। एक बेहद अहम मुकाबले के बाद, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल की है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी और इंडिया गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से हरा दिया है।
जीत के आंकड़े और समीकरण
मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्णन ने 452 वोट हासिल किए, जबकि उनके मुकाबले में खड़े विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। इस चुनाव में जीत के लिए 392 वोटों की जरूरत थी, जिसे राधाकृष्णन ने आसानी से पार कर लिया।
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एनडीए उम्मीदवार को अपनी तय संख्या से कहीं ज्यादा वोट मिले। भाजपा ने दावा किया है कि विपक्ष के 14 सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग करते हुए राधाकृष्णन के पक्ष में वोट किया। यह विपक्ष की एकता के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कुल 782 सांसदों को मतदान का अधिकार था, जिसमें से 767 सांसदों ने ही वोट डाले। इनमें से 15 वोट अमान्य पाए गए, यानी ये वोट किसी भी उम्मीदवार के खाते में नहीं जा सके। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है कि सांसदों को भी वोटिंग प्रक्रिया को लेकर और अधिक प्रशिक्षण की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की गलतियां न हों।
क्यों हुआ था यह चुनाव?
यह चुनाव उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जुलाई में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद आयोजित किया गया था। संसद परिसर के वसुंधा भवन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान चला, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सांसदों ने हिस्सा लिया।
सीपी राधाकृष्णन की जीत ने राज्यसभा में एनडीए की स्थिति को और मजबूत कर दिया है, क्योंकि वे अब सदन के सभापति की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। उनकी यह जीत सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और विपक्षी खेमे में भी सेंध लगाने की एनडीए की क्षमता को दर्शाती है।
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