Ansal API: लखनऊ मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति गठित, जानिए कमेटी में कौन-कौन शामिल?
Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ की शहीद पथ पर स्थित अंसल एपीआई की हाइटेक टाउनशिप “सुशांत गोल्फ सिटी” में जमीन घोटाले की परतें अब आधिकारिक तौर पर खुलने लगी हैं। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, धोखाधड़ी से बिक्री और हजारों लोगों को ठगने के मामले में राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति की अगुवाई लखनऊ के मंडलायुक्त कर रहे हैं, और इसकी पहली बैठक 12 जून को बुलाई गई है।

आरोप है कि अंसल एपीआई ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की 411 एकड़ जमीन को गिरवी रखे होने के बावजूद बेच डाला। इस मामले में एलडीए ने कंपनी के निदेशक समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मार्च में मामला सुर्खियों में आने के बाद अप्रैल में सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।
दिवालिया घोषित, पांच हजार से अधिक खरीदार फंसे
25 फरवरी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अंसल एपीआई को दिवालिया घोषित कर दिया था। वजह थी एक फाइनेंस कंपनी का 83 करोड़ रुपये बकाया भुगतान न करना। इसके बाद टाउनशिप में घर या प्लॉट खरीद चुके करीब 5,000 लोगों की उम्मीदें टूट गईं। भुगतान करने के बावजूद उन्हें न तो मकान मिला, न प्लॉट।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि अंसल ने जिन जमीनों पर विकास कार्य किया, वे ज़मीनें उसके स्वामित्व में नहीं थीं। इनमें ग्राम सभा और सरकारी भूमि भी शामिल हैं। जांच समिति अब यह भी देखेगी कि टाउनशिप में अधूरे काम पूरे कराने में कितना खर्च आएगा।
इन पांच बिंदुओं पर होगी गहराई से जांच
सरकारी, ग्राम सभा और चकमार्ग की जमीनों पर अवैध कब्जा और संबंधित बकाया की स्थिति।
एलडीए के नाम गिरवी रखी गई जमीनों को किसने और कैसे बेचा – इसका पूरा ब्यौरा।
अधूरी टाउनशिप को पूरा करने में कितना खर्च आएगा – उसका मूल्यांकन।
बिना मालिकाना हक के कितनी सरकारी जमीनें आवंटित की गईं और किन्हें दी गईं।
योजना से जुड़े कंसोर्सियम सदस्यों द्वारा खरीदी और बेची गई जमीन का पूरा विवरण।
जांच समिति में ये अधिकारी शामिल
- मंडलायुक्त, लखनऊ (अध्यक्ष)
- जिलाधिकारी, लखनऊ
- उप महानिरीक्षक (स्टाम्प विभाग, उत्तर प्रदेश)
- उपाध्यक्ष, एलडीए
- नगर आयुक्त, नगर निगम लखनऊ
- मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, नगर नियोजन विभाग
- निदेशक-सलाहकार, आवास बंधु
- मुख्य अभियंता, एलडीए
- मुख्य नगर नियोजक, एलडीए
बैठक के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंप दी जाएगी। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और आम जनता को कैसे ठगा गया।
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