साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा: IRDAI और RBI के अधिकारी बनकर ठगी करने वाले 2 लोग गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के दो सदस्यों को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को IRDAI, RBI, IGMS और NPCI जैसे सरकारी संस्थानों के अधिकारी बताकर लोगों को ठगते थे।

कैसे करते थे ये लोग ठगी?

पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये लोग उन बीमाधारकों को निशाना बनाते थे जिनकी पॉलिसी मैच्योर हो चुकी होती थी। ये उन्हें कॉल कर के बताते थे कि उनकी पॉलिसी की यूनिट वैल्यू से ज़्यादा मैच्योरिटी अमाउंट दिलवा सकते हैं। इसके लिए वे उनसे ‘एजेंट कोड’ हटवाने, पॉलिसी सेटलमेंट और सर्विस चार्ज जैसे अलग-अलग बहाने से पैसे वसूलते थे। ठगी को अंजाम देने के लिए ये लोग फर्जी जीबीआई (GBI) बॉन्ड पेपर और सरकारी संस्थाओं के जाली आईडी कार्ड का इस्तेमाल करते थे। इन कागज़ातों पर भरोसा करके लोग उनके बताए फर्जी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे।

ठगी के इस मामले का हुआ खुलासा

एक ऐसा ही मामला भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. लाल सिंह गंगवार के साथ हुआ। इन ठगों ने उनसे फर्जी दस्तावेजों के नाम पर ₹3,66,890 ठग लिए। डॉ. गंगवार ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। तकनीकी जांच और मुखबिरों की सूचना पर एसटीएफ की टीम ने गाजियाबाद के वैशाली स्थित एक ऑफिस में छापा मारा और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान दीपक तिवारी और बादल वर्मा के रूप में हुई है। पूछताछ में दीपक ने बताया कि वह पहले इंश्योरेंस ब्रोकर का काम कर चुका है और कोविड के बाद उसे कारोबार में घाटा हुआ, जिसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी शुरू की। पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, फर्जी आधार और पैन कार्ड सहित अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह पिछले 7 महीनों में ₹50-60 लाख की ठगी कर चुका है। आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।

Also Read: लखनऊ में दिनदहाड़े कार लूट, ट्रायल के बहाने फॉर्च्यूनर लेकर फरार हुए बदमाश, FIR दर्ज

Get real time updates directly on you device, subscribe now.