नारकोटिक्स अधिकारी बन डिजिटल अरेस्ट का झांसा देने वाले साइबर ठग गिरफ्तार, UP STF ने महाराष्ट्र से दबोचे 2 आरोपी

Lucknow News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो खुद को पुलिस, नारकोटिक्स या क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का झांसा देकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देता था। STF ने इस गिरोह के दो सदस्यों को महाराष्ट्र के मीरारोड, ठाणे से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।

पुलिस के अनुसार, मुहम्मद इकबाल बालासाहेब (47 वर्ष) और शाइन इकबाल बालासाहेब (42 वर्ष) को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बी विंग फ्लैट न. 605, इराइजा विल्डिंग के सामने, कनकिया रोड, निकट थाना मीरारोड से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी सगे भाई हैं। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेनड्राइव, हार्ड डिस्क, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, माउस, लैपटॉप चार्जर व 450 रुपये नकद बरामद किया है।

क्या था ठगी का तरीका

यह गिरोह लोगों को व्हाट्सएप कॉल के जरिए निशाना बनाता था। ठग खुद को ब्लू डॉट कोरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे और कहते थे कि उनके नाम से एक ‘अवैध पार्सल’ पकड़ा गया है, जिसमें गैरकानूनी सामान है। इसके बाद वे कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए पीड़ित की बात एक ‘जांचकर्ता पुलिस अधिकारी’ (जो पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल पर आता था) से करवाते थे।

यह तथाकथित पुलिस अधिकारी पीड़ित को डराता था कि उनके आधार नंबर का दुरुपयोग करके अवैध पार्सल भेजा जा रहा है, जिससे उन्हें या उनके परिवार को गंभीर नुकसान हो सकता है। पीड़ित को जांच में सहयोग करने और किसी से भी इस बारे में बात न करने की धमकी दी जाती थी। इसके बाद, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का एक फर्जी पत्र व्हाट्सएप पर भेजकर, जांच पूरी होने तक भारी रकम (जैसे 95 लाख रुपये) एक बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा जाता था, यह कहकर कि जांच के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।

प्रो. डॉ. बीएन सिंह इसका शिकार हुए, जिनसे 6 अप्रैल, 2025 को 95 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद थाना साइबर क्राइम लखनऊ में मु.अ.सं. 60/2025 दर्ज किया गया।

STF की जांच और आरोपियों के कबूलनामे

अपर पुलिस अधीक्षक, STF, उप्र विशाल विक्रम सिंह के पर्यवेक्षण में STF मुख्यालय की साइबर टीम ने इस मामले में अभिसूचना संकलन शुरू किया। तकनीकी विशेषज्ञता और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर 24 जुलाई, 2025 को STF और साइबर क्राइम लखनऊ की टीम ने मीरा रोड, ठाणे से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार मोहम्मद इकबाल बालासाहेब ने पूछताछ में बताया कि वह 2008 में कुवैत से भारत लौटा था और कई कंपनियाँ खोलीं जो बाद में बंद हो गईं। 2024 में अपने दोस्तों फरीद शेख और आरिफ खान के कहने पर उसने अपने भाई शाइन के साथ मिलकर एमआईबी कंप्यूटर्स एलएलपी नाम से एक कंपनी बनाई, जिसका पता फर्जी था। इस कंपनी के नाम पर उन्होंने RBL बैंक में एक कॉर्पोरेट खाता खुलवाया, जिसमें बल्क ट्रांजैक्शन की सुविधा ली।

उसने कबूल किया कि 8 अप्रैल 2025 को उसकी कंपनी के बैंक खाते में ‘डिजिटल अरेस्ट/शेयर ट्रेडिंग साइबर फ्रॉड’ के माध्यम से लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये आए। गिरोह के सदस्यों ने इस रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर, क्रिप्टो और कैश में बदल लिया। इकबाल ने बताया कि उनके गिरोह ने देश के विभिन्न राज्यों के लोगों से साइबर धोखाधड़ी कर अवैध रूप से धन कमाया है। पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने खुद ही 20 दिन बाद अपना बैंक खाता और ईमेल आईडी हैक होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

शाइन इकबाल बालासाहेब ने भी अपने भाई के बयान का समर्थन करते हुए स्वीकार किया कि पैसों के लालच में वह भी इस धोखाधड़ी में शामिल हो गया। यह कंपनी विशेष रूप से साइबर धोखाधड़ी के लिए ही बनाई गई थी, ताकि अलग-अलग बैंकों में आसानी से कॉर्पोरेट खाते खोलकर डिजिटल अरेस्ट या शेयर ट्रेडिंग जैसे फ्रॉड के जरिए ठगी की जा सके और बल्क ट्रांजैक्शन के माध्यम से कम समय में सैकड़ों खातों में पैसे ट्रांसफर किए जा सकें।

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