पाकिस्तान से आए दलितों को मिले आवास, अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर Supreme Court ने लगाई रोक

Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को पाकिस्तान से आए दलितों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान से निर्वासित होकर भारत आए दलितों को केवल भारतीय नागरिकता दे देना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को सम्मानजनक तरीके से रहने के लिए आवास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाओ अभियान पर रोक लगाते हुए सरकार से चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

नागरिकता के साथ सम्मानजनक जीवन जरूरी

दरअसल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की यह टिप्पणी पाकिस्तान से आए हिंदू दलित परिवारों के मामले में आई है, जो दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज के पास मजनूं का टीला इलाके में रहते हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच कर रही है। अदालत ने कहा कि नागरिकता मिलने के बावजूद इन परिवारों पर विस्थापन का खतरा बना हुआ है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकता देने के साथ-साथ पुनर्वास और आवास की व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि ऐसे लोग सम्मानजनक जीवन जी सकें।

अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर Supreme Court की रोक

यहां सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सरकार को निर्देश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करे। इसके साथ ही अदालत ने इलाके में चल रही या प्रस्तावित किसी भी अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई या विकास परियोजना पर रोक लगा दी है, जिससे इन परिवारों को विस्थापन का खतरा हो सकता है। अदालत ने साफ किया कि जब तक सरकार अपना पक्ष नहीं रखती, तब तक इन लोगों को हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वहीं सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस फैसले से करीब 250 दलित परिवारों और लगभग 1,000 लोगों को बड़ी राहत मिली है। ये परिवार कई वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं। हाल की मुहिम के चलते इनके सामने आवास और पुनर्वास का बड़ा संकट खड़ा हो गया था, जिससे इनका भविष्य अनिश्चित हो गया था।

पाकिस्तान में उत्पीड़न के बाद भारत आए थे परिवार

जानकारी के अनुसार ये दलित हिंदू परिवार पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होने के बाद भारत आए थे। कई वर्षों तक शरणार्थी के रूप में जीवन बिताने के बाद इन्हें नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के तहत भारतीय नागरिकता दी गई। अब अदालत (Supreme Court) ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि नागरिकता देने के बाद इन परिवारों को स्थायी रूप से बसाने के लिए क्या योजना बनाई गई है।

 

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