Delhi Assembly Session: आज पेश होगी CAG रिपोर्ट, विधानसभा पहुंचीं सीएम रेखा गुप्ता
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली विधानसभा का आज दूसरा दिन है, और सत्र के दौरान बहुप्रतीक्षित नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की जाएगी। तो वहीं विपक्ष ने भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
सीएजी रिपोर्ट पर नेताओं की प्रतिक्रिया
बीते सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना से मुलाकात की थी। इस रिपोर्ट को लेकर दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “यह एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट है, जिसका हम लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। आज इसे पेश किया जा रहा है, और इसके माध्यम से हम देखेंगे कि आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की जनता के साथ क्या किया।”
भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने भी सीएजी रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा, “दिल्ली सरकार ने बजट का दुरुपयोग किया है। इस रिपोर्ट के जरिए जनता को पता चलेगा कि 10-12 वर्षों तक सत्ता में रहने वाले नेताओं ने उनके लिए क्या किया है।”
दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “आज अरविंद केजरीवाल सरकार के घोटालों को उजागर करने वाली सीएजी रिपोर्ट पेश हो रही है। उन्होंने इस रिपोर्ट को पिछले तीन वर्षों से छिपाकर रखा था। अब 14 महत्वपूर्ण रिपोर्टें सामने लाई जाएंगी, जिससे जनता को उनकी लूट और भ्रष्टाचार का पता चलेगा।”
डीटीसी को लेकर सीएजी रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
सीएजी रिपोर्ट में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के संचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें उजागर की गई हैं:
पर्याप्त बसों की खरीद में देरी
धन उपलब्ध होने के बावजूद, डीटीसी ने आवश्यक संख्या में बसें नहीं खरीदीं। इलेक्ट्रिक बसों के अनुबंध को अंतिम रूप देने में देरी हुई, जिससे अनुबंध की अवधि कम हो गई।
किराया संरचना में कोई बदलाव नहीं
डीटीसी की किराया संरचना 2009 से अब तक अपरिवर्तित बनी हुई है, जिससे आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा योजना का प्रभाव
सरकार द्वारा महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा शुरू करने से डीटीसी की वित्तीय स्थिति और अधिक प्रभावित हुई।
व्यावसायिक योजना का अभाव
डीटीसी के पास वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार के लिए कोई स्पष्ट योजना या रोडमैप नहीं है।
बेड़े की अक्षमता
डीटीसी की बसों में प्रत्येक 10,000 किमी पर 2.9 से 4.5 बार ब्रेकडाउन हुआ, जो अन्य राज्य-संचालित परिवहन सेवाओं और निजी बसों की तुलना में काफी अधिक है।
खराब रूट प्लानिंग
डीटीसी कुल 814 रूटों में से केवल 57% पर ही परिचालन कर रही थी। किसी भी रूट पर परिचालन लागत की वसूली नहीं हो सकी, जिससे सात वर्षों में 14,199 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
सरकारी अनुदान के बावजूद घाटा
2015 से 2022 के बीच दिल्ली सरकार ने डीटीसी को 13,381 करोड़ रुपये का राजस्व अनुदान दिया, फिर भी 818 करोड़ रुपये की कमी बनी रही।
समझौता ज्ञापन की अनुपस्थिति
डीटीसी ने दिल्ली परिवहन विभाग के साथ भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए कोई समझौता ज्ञापन (MoU) साइन नहीं किया।
सुरक्षा और स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली में देरी
स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली और सीसीटीवी निगरानी प्रणाली की योजना कई वर्षों से बनी थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।
सीएजी की रिपोर्ट से दिल्ली सरकार के वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद दिल्ली विधानसभा में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। जनता अब इस रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सरकार से जवाबदेही की उम्मीद कर रही है।
Also Read: UP Advocate Strike: यूपी में आज वकीलों की हड़ताल, एडवोकेट अमेंडमेंट बिल के खिलाफ आक्रोश

