Delhi Excise Case: क्या फिर जेल जाएंगे केजरीवाल? CBI अपील पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली के चर्चित आबकारी नीति (Excise Policy) मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
‘लॉकडाउन में रिश्वत के लिए उड़े प्राइवेट जेट’
सीबीआई की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि यह भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला है। उन्होंने दावा किया कि सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने करीब 170 फोन नष्ट किए। मेहता ने एक चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा, “जब कोरोना काल में पूरा देश लॉकडाउन में था, तब रिश्वत के लेन-देन के लिए प्राइवेट जेट तक का इस्तेमाल किया गया।”
गवाहों के बयानों को नजरअंदाज करने का आरोप
सीबीआई ने अपनी करीब 1000 पन्नों की याचिका में निचली अदालत के फैसले को ‘गैरकानूनी’ बताया है। जांच एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने मुख्य गवाह (अप्रूवर) दिनेश अरोड़ा के बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जो कि इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। सीबीआई के मुताबिक, आबकारी नीति को जानबूझकर इस तरह बनाया गया था कि कुछ निजी कंपनियों को मोटा फायदा पहुंचाया जा सके।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत की टिप्पणी पर लगाई रोक
इससे पहले 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई के केस को ‘बनावटी’ बताते हुए सभी को बरी कर दिया था और जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए थे। हालांकि, आज हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई वाले बयान पर रोक लगा दी है। साथ ही, अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस की सुनवाई फिलहाल स्थगित करने का निर्देश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद साल 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति से शुरू हुआ था। भ्रष्टाचार और रिश्वत के आरोपों के बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया था। सीबीआई का आरोप है कि इस नीति के जरिए करोड़ों रुपये की रिश्वत का खेल खेला गया। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
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