सिर्फ ब्रेकअप आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व प्रेमिका की खुदकुशी मामले में आरोपी को दी जमानत

Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि प्यार में मिला धोखा या प्रेम संबंध का टूट जाना आपराधिक कानून के तहत उकसाने (Abetment) का मामला नहीं बनता। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने यह टिप्पणी एक ऐसे युवक को जमानत देते हुए की, जिसकी शादी से महज पांच दिन पहले उसकी पूर्व प्रेमिका ने मौत को गले लगा लिया था।

न्यायमूर्ति मनोज जैन ने जमानत देते हुए कहा कि उकसाने का आरोप तब टिकता है जब आरोपी ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हों कि पीड़ित के पास जान देने के अलावा कोई और रास्ता ही न बचा हो। कोर्ट ने कहा, यह विस्तृत सुनवाई के बाद ही पता चलेगा कि युवती ने यह कदम किसी के दबाव में उठाया या फिर वह स्वभाव से बेहद संवेदनशील थी। केवल ब्रेकअप हो जाना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं है।

क्या था पूरा मामला

आरोपी और पीड़िता करीब 8 साल तक रिश्ते में थे। युवती के पिता का आरोप था कि युवक ने उनकी बेटी को फंसाया और शादी के लिए धर्म बदलने का दबाव डाला। इसी मानसिक तनाव के चलते उनकी बेटी ने अक्टूबर 2025 में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। युवक को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

हाईकोर्ट ने किन बातों पर गौर किया

अदालत ने केस की बारीकियों को देखते हुए कई अहम बिंदुओं को रेखांकित किया।

कोई सुसाइड नोट नहीं: पीड़िता के पास से कोई पत्र नहीं मिला जिसमें मौत के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया गया हो।

लंबा मौन: रिकॉर्ड बताते हैं कि फरवरी 2025 के बाद से दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी। आत्महत्या से महीनों पहले से दोनों संपर्क में नहीं थे।

दोस्तों की गवाही: मृतका के दोस्तों ने बताया कि वह परेशान तो थी, लेकिन उसने कभी धर्म परिवर्तन के दबाव जैसी कोई बात नहीं कही थी।

पारिवारिक विरोध: आरोपी का कहना था कि अलग-अलग धर्म होने के कारण युवती के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे और उन्होंने ही उसे रिश्ता तोड़ने पर मजबूर किया था।

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