Turkman गेट हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जमानत रद्द
Sandesh Wahak Digital Desk: तुर्कमान गेट (Turkman Gate) हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उस आरोपी को दी गई जमानत रद्द कर दी है, जो इस महीने की शुरुआत में फैज ए इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाए जाने के अभियान के दौरान पथराव करने वाली भीड़ में कथित रूप से शामिल था। जस्टिस प्रतीक जालान ने जमानत आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए अधीनस्थ अदालत को वापस भेज दिया है।
आदेश को बताया अस्पष्ट और तर्कहीन
जस्टिस प्रतीक जालान ने अपने आदेश में कहा कि अदालत किसी व्यक्ति को दी गई राहत में हस्तक्षेप करने में बेहद सतर्क रहती है, लेकिन यह मामला असाधारण है। उन्होंने कहा कि रेहड़ी पटरी लगाने वाले उबैदुल्ला को एक अस्पष्ट और तर्कहीन आदेश के आधार पर जमानत दी गई थी। अधीनस्थ अदालत ने उबैदुल्ला को 20 जनवरी को जमानत दी थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
हाई कोर्ट ने कहा कि जमानत आदेश में अभियोजन पक्ष के तर्कों पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया। जमानत के फैसले को नियंत्रित करने वाले कारकों का भी समुचित विश्लेषण नहीं किया गया था। अदालत ने 21 जनवरी को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पर्याप्त कारणों के अभाव में अधीनस्थ अदालत का आदेश रद्द किया जाता है और मामले को सत्र न्यायालय को वापस भेजा जाता है।
हिंसा की घटना और पुलिस का पक्ष
दरअसल यह मामला 6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात को रामलीला मैदान क्षेत्र में फैज ए इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट (Turkman Gate) के सामने स्थित मस्जिद को ध्वस्त किया जा रहा है, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। पुलिस का कहना है कि करीब 150 से 200 लोगों ने पुलिस और दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं, जिससे थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।
वहीं पथराव की घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि अतिक्रमण हटाने से पहले इस संबंध में बैठक की गई थी। अमन कमेटी के साथ भी बैठक हुई थी, जिसमें यह साफ किया गया था कि मस्जिद को नहीं बल्कि उसके आसपास के अतिक्रमण को हटाया जाएगा। पुलिस ने बताया कि 120 से 130 से अधिक मौलवियों के साथ बैठक कर उन्हें इस बारे में जानकारी दी गई थी और यह भी कहा गया था कि यदि किसी को आदेश से आपत्ति है तो वह अपील कर सकता है।
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