‘पेंशन बढ़ाए सरकार, वरना दिल्ली में देंगे दस्तक’, बाराबंकी में लोकतंत्र सेनानियों की हुंकार

Sandesh Wahak Digital Desk: बाराबंकी के गांधी भवन में लोकतंत्र सेनानियों का तीन दिवसीय समागम भावुक पलों और बड़े संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। सेनानियों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी है और सरकार से सम्मान राशि बढ़ाने की अपील की है।

गांधी भवन में आयोजित ‘लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति’ का तीन दिवसीय चिंतन शिविर गुरुवार को संपन्न हो गया। इस शिविर के आखिरी दिन सेनानियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और सर्वसम्मति से 13 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए। कार्यक्रम का समापन महान समाजवादी नेता आचार्य नरेंद्र देव को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।

‘पेंशन बढ़ाए सरकार, वरना दिल्ली में देंगे दस्तक’, बाराबंकी में लोकतंत्र सेनानियों की हुंकार

पेंशन वृद्धि और अन्य सुविधाएं

शिविर में पारित प्रस्तावों में सबसे प्रमुख मांग राज्य सरकार से है। सेनानियों ने मांग की है कि लोकतंत्र सेनानी सम्मान राशि (पेंशन) में बढ़ोतरी को लेकर विधान परिषद ने जो राय दी है, उसे सरकार तत्काल प्रभाव से लागू करे। मांग की गई है कि लोकतंत्र सेनानियों को भी वे सभी सुविधाएं दी जाएं, जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलती हैं।

‘पेंशन बढ़ाए सरकार, वरना दिल्ली में देंगे दस्तक’, बाराबंकी में लोकतंत्र सेनानियों की हुंकार

समिति के संरक्षक राजनाथ शर्मा ने घोषणा की है कि इन प्रस्तावों का ज्ञापन जल्द ही भारत सरकार के गृह मंत्री और नीति आयोग को सौंपा जाएगा। सेनानियों ने अपने संरक्षक राजनाथ शर्मा को संघर्ष में निरंतर सहयोग का वचन देते हुए सम्मानित भी किया।

‘पेंशन बढ़ाए सरकार, वरना दिल्ली में देंगे दस्तक’, बाराबंकी में लोकतंत्र सेनानियों की हुंकार

श्रद्धांजलि और सम्मान का संगम

समापन सत्र की शुरुआत महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर हुई। इस दौरान जेपी आंदोलन के पुरोधाओं और दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों जैसे विंध्यवासिनी कुमार, यमुना प्रसाद अवस्थी और चंद्रभानु सिंह को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। गांधी भवन की ओर से आए हुए सभी सेनानियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

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विदाई के वक्त छलके आंसू

कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वह था जब संरक्षक राजनाथ शर्मा सेनानियों को विदा कर रहे थे। उनकी आंखें नम हो गईं और उन्होंने भरे गले से कहा  “क्या पता अगली बार मुलाकात होगी या नहीं, इसलिए जब तक सांस चले लोकतंत्र के लिए लड़ते रहिए।” उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया।

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