धानुका एग्रीटेक ने रबी सीजन में आलू की फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए दिए महत्वपूर्ण टिप्स
Sandesh Wahak Digital Desk: रबी सीजन की शुरुआत हो चुकी है और देशभर के किसान आलू की बुवाई की तैयारियों में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। आलू एक प्रमुख नगदी फसल है, लेकिन मौसम, रोग और कीटों के प्रकोप के कारण इसकी पैदावार और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। किसानों को एक स्वस्थ और लाभदायक फसल सुनिश्चित करने के लिए धानुका एग्रीटेक ने वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और संरक्षण पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी है।
बुवाई का सही तरीका और समय
विशेषज्ञों के अनुसार, आलू की अच्छी पैदावार के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
बीज का चयन: किसानों को हमेशा प्रमाणित और रोग-मुक्त बीज आलू का ही उपयोग करना चाहिए।
बुवाई का समय: क्षेत्र और तापमान के अनुसार, बुवाई का सही समय अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक माना जाता है।
दूरी: बेहतर विकास और सही हवा के प्रवाह के लिए पौधों के बीच 20-25 सेंटीमीटर और कतारों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखना आवश्यक है।
मिट्टी: मिट्टी भुरभुरी, जैविक पदार्थों से भरपूर और जल निकासी युक्त होनी चाहिए।
आलू की फसल को प्रभावित करने वाली मुख्य बीमारियों में अर्ली ब्लाइट (अगेती झुलसा) और लेट ब्लाइट (पछेती झुलसा) शामिल हैं, जो ठंडे और नमी वाले मौसम में तेजी से फैलती हैं।
उन्नत सिंचाई और पोषण
स्वस्थ कंदों (गाँठों) के विकास के लिए मिट्टी में समान नमी बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए स्प्रिंकलर या ड्रिप सिंचाई को सबसे बेहतर माना जाता है। साथ ही, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और जैविक खादों का सही अनुपात में प्रयोग करने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है। धानुका एग्रीटेक का मानना है कि वैज्ञानिक खेती और समय पर फसल सुरक्षा समाधानों को अपनाकर किसान इस महत्वपूर्ण सर्दी की फसल से अधिक पैदावार और बेहतर आय सुनिश्चित कर सकते हैं।
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