फर्जीवाड़े के आरोपों में उलझा दिग्विजय सिंह की जमीन का मामला, अब ASP और CO करेंगे जांच

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में स्थित सांसद दिग्विजय सिंह की पैतृक जमीन को लेकर चल रहा विवाद प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आलापुर क्षेत्र के रामनगर महुवर गांव की इस कीमती जमीन पर अब पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच शुरू हो गई है।

क्या है पूरा विवाद?

मामला रामनगर महुवर गांव की गाटा संख्या 1235 क से जुड़ा है। यह जमीन मूल रूप से दिग्विजय सिंह की माता स्वर्गीय अर्पणा देवी के नाम पर थी। 18 मई 2024 को ऑनलाइन विरासत प्रक्रिया के जरिए यह जमीन दिग्विजय सिंह के नाम दर्ज हुई।

दूसरी ओर, हंसवर क्षेत्र के रामहरख चौहान ने खुद को दिग्विजय सिंह का ‘मुख्तार-ए-आम’ (पावर ऑफ अटॉर्नी धारक) बताते हुए दावा किया कि उन्होंने 5 अक्टूबर 1989 को ही यह जमीन राजबहादुर और जियालाल आदि के नाम बेच दी थी।

बैनामे के आधार पर जमीन अपने नाम कराने के लिए विपक्षियों ने वाद दायर किया था, जिसे 22 दिसंबर 2025 को साक्ष्यों की कमी के कारण नायब तहसीलदार आलापुर ने निरस्त कर दिया था। हालांकि, विपक्षी पक्ष ने हार नहीं मानी है और फिर से नामांतरण की अपील दाखिल कर दी है, जो फिलहाल लंबित है।

जांच की निष्पक्षता पर सवाल

सांसद के केयरटेकर अनिल यादव ने इस पूरी जांच प्रक्रिया पर संदेह जताया है। उनका आरोप है कि मामला एक पूर्व पुलिस अधिकारी (जियालाल) से जुड़ा होने के कारण वर्तमान जांच टीम पर दबाव हो सकता है। इसी बीच, एसपी कार्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फर्जी हस्ताक्षर और पावर ऑफ अटॉर्नी के आरोपों की गहराई से जांच करने के लिए एएसपी (पूर्व) और सीओ आलापुर को मैदान में उतारा है।

एसडीएम सुभाष सिंह के मुताबिक, तहसीलदार इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहे हैं। पुलिस और राजस्व विभाग की रिपोर्ट मिलते ही इस पर अंतिम और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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