लखनऊ में दिव्यांगों का प्रदर्शन, डीएम कार्यालय का घेराव कर उठाई न्याय और सुरक्षा की मांग

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ में दिव्यांगजन सड़क पर उतर आए। अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में दिव्यांग महागठबंधन उत्तर प्रदेश और कांग्रेस निशक्तजन विकलांग प्रकोष्ठ से जुड़े सैकड़ों दिव्यांगजन शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने उन्हें विकलांग से दिव्यांग तो कह दिया, लेकिन व्यवहारिक जीवन में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आया है। दिव्यांग महागठबंधन के कोषाध्यक्ष जितेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि सिर्फ शब्द बदलने से कुछ नहीं होगा। असल ज़रूरत है दिव्यांगों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की। लेकिन हमें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भर में दिव्यांगों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। लखीमपुर, कन्नौज, कानपुर और यहां तक कि लखनऊ में भी दिव्यांगों को निशाना बनाया गया है, लेकिन पुलिस प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।

‘पुलिस खुद परेशान कर रही दिव्यांगों को’

जितेंद्र कुमार ने बताया कि कई मामलों में पुलिस ही नियमों को दरकिनार कर दिव्यांगों को ही आरोपी बना रही है। उन्होंने दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने इसे लागू करने की गंभीर कोशिश नहीं की।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन डीएम के माध्यम से सौंपा, जिसमें उन्होंने मांग की कि दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 को पूरी तरह लागू किया जाए। हर थाने में दिव्यांग सहायता बोर्ड की व्यवस्था की जाए। दिव्यांगों की सुरक्षा के लिए DGP से मिलने का समय मांगा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और धरना तेज किया जाएगा।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने पर हमला

कांग्रेस विकलांग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मनीष ने आरोप लगाया कि उन्हें और अन्य दिव्यांगजनों को तब निशाना बनाया गया, जब उन्होंने मंदिर के आसपास चल रहे गांजा और नशे के कारोबार का विरोध किया। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि जान से मारने की कोशिश भी की गई। “हमने आलमबाग थाने में FIR के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि जल्द न्याय न मिला, तो वह राज्यव्यापी महाआंदोलन करेंगे।

सरकार से जवाबदेही और संवेदनशीलता की मांग

प्रदर्शन में शामिल सभी दिव्यांगों ने एक सुर में कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि दिव्यांगों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न पर अंकुश, न्याय की समय पर उपलब्धता और बुनियादी सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी ज़रूरत है।

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