कानपुर में DM vs CMO…सियासत तक पहुंची अफसरशाही की जंग, बीजेपी विधायकों में भी खुला मतभेद
Sandesh Wahak Digital Desk: कानपुर, उत्तर प्रदेश का औद्योगिक दिल, इन दिनों एक अलग ही वजह से सुर्खियों में है। यहां जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के बीच चल रही तनातनी अब राजनीतिक मोड़ ले चुकी है। आलम यह है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भी इस विवाद में दो खेमों में बंट गए हैं।

एक ओर, बिठूर के विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने CMO डॉ. हरिदत्त नेमी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें हटाने की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कर डाली है। वहीं दूसरी ओर, शहर के तीन अन्य भाजपा नेता विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, एमएलसी अरुण पाठक और विधायक सुरेंद्र मैथानी डॉ. नेमी के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर डॉ. नेमी को ईमानदार और जनता का हितैषी बताते हुए उनके स्थानांतरण का विरोध किया है।
CMO की कार्यशैली पर सवाल
यह पूरा मामला तब तूल पकड़ गया जब डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने स्वास्थ्य विभाग में फैली अव्यवस्थाओं और डॉक्टरों के तबादलों में कथित मनमानी को लेकर सीएमओ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने शासन को पत्र लिखकर सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। डीएम का आरोप है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है और इसमें सीएमओ की निष्क्रियता का बड़ा हाथ है।

वायरल ऑडियो क्लिप्स ने बढ़ाया बवाल
इस विवाद में और आग तब लगी जब सोशल मीडिया पर तीन कथित ऑडियो क्लिप्स वायरल हुईं, जिनमें डॉ. नेमी डीएम के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं। इनमें से एक क्लिप में कहा गया है, “75 जिलों में ऐसा डीएम नहीं देखा जो इस तरह बात करता हो।” एक अन्य क्लिप में कथित रूप से पैसों के लेनदेन की चर्चा भी हो रही है।
जब डीएम ने एक बैठक में डॉ. नेमी से इन क्लिप्स पर जवाब मांगा, तो उन्होंने इन्हें फर्जी करार देते हुए दावा किया कि ये उनकी आवाज नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई हैं। डीएम ने सीधा सवाल किया कि अगर आप निर्दोष हैं तो क्लिप बनाने वाले पर FIR दर्ज कराइए। जब स्पष्ट उत्तर नहीं मिला, तो उन्होंने CMO को बैठक से बाहर कर दिया।

राजनीतिक हस्तक्षेप और दो ध्रुव
जहां एक तरफ सतीश महाना और अन्य विधायक डॉ. नेमी के समर्थन में खड़े हुए और उन्हें एक दक्ष प्रशासक बताते हुए उनके ट्रांसफर पर रोक की मांग की, वहीं अभिजीत सिंह सांगा का आरोप है कि CMO भ्रष्ट हैं, अधिकारियों और स्टाफ से दुर्व्यवहार करते हैं और डीएम को बदनाम करने के लिए फर्जी ऑडियो फैलवा रहे हैं।
CMO की सफाई: यह एक गहरी साजिश
CMO डॉ. हरिदत्त नेमी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि यह पूरा विवाद एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह केवल विभागीय सुधार के लिए काम कर रहे हैं और ऑडियो क्लिप्स उनकी छवि को खराब करने के मकसद से बनाई गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच होती है, तो सच सामने आ जाएगा।
सवाल अब भी कायम…
अभी तक वायरल ऑडियो क्लिप्स की तकनीकी जांच नहीं हुई है, न ही यह साबित हो पाया है कि वे असली हैं या नकली। अब निगाहें शासन पर टिकी हैं क्या CMO पर कार्रवाई होगी या फिर ऑडियो फैलाने वालों पर शिकंजा कसेगा?
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