नजरअंदाज न करें Insulin Resistance, बढ़ सकता है ये खतरा

Sandesh Wahak Digital Desk: जब शरीर के सेल्स इंसुलिन हॉर्मोन के असर को ठीक से महसूस नहीं कर पाते तब इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) होता है। दरअसल इंसुलिन (Insulin) का मुख्य काम ब्लड शुगर को कंट्रोल करना और ग्लूकोज को सेल्स तक पहुंचाना होता है, ताकि शरीर को ऊर्जा मिल सके। लेकिन जब सेल्स इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाते, तो ब्लड शुगर का संतुलन बिगड़ने लगता है। दरअसल इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। असल में गलत खानपान, ज्यादा शुगर और फैट वाली डाइट, शारीरिक एक्टिविटी की कमी, तनाव और नींद की कमी जैसी आदतें इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वहीं मोटापा, खासकर पेट के आसपास जमा होने वाला फैट, इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) का एक बड़ा कारण माना जाता है। जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम की समस्या रही है, उनमें इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। महिलाओं में, खासकर जिनमें पीसीओएस जैसी स्थिति होती है, उनमें भी इसका जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए समय रहते इसे पहचानना जरूरी होता है, ताकि स्वास्थ्य पर इसके गंभीर असर को रोका जा सके।

Insulin Resistance से क्या खतरा

जानकार मानते हैं कि इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसमें सबसे बड़ा खतरा टाइप-2 डायबिटीज का होता है। इसके अलावा इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) के कारण हार्ट से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है। जैसे- हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी इससे जुड़ी हुई मानी जाती है।

वहीं महिलाओं में यह स्थिति पीसीओएस से जुड़ी परेशानियों को और बढ़ा सकती है। इसके साथ ही इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) शरीर में सूजन और मेटाबॉलिक सिंड्रोम की संभावना को भी बढ़ाता है। बताया जाता है कि इसका असर शरीर की ऊर्जा पर भी पड़ता है। जिससे कई लोगों को वजन बढ़ने, एनर्जी कम होने और लगातार थकान महसूस होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। वहीं अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो ये समस्याएं आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं।

इंसुलिन रजिस्टेंस के लक्षण

दरअसल इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) के शुरुआती लक्षण अक्सर इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोगों को जल्दी थकान महसूस होती है, बार-बार भूख लगती है और मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है। इसके अलावा वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास फैट जमा होना भी इसका एक सामान्य संकेत माना जाता है। कुछ लोगों में त्वचा पर डार्क पैच दिखाई देने लगते हैं या खुजली जैसी समस्या भी हो सकती है।

असल में शुरुआत में ये संकेत सामान्य लग सकते हैं, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में ब्लड टेस्ट कराकर इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) की पुष्टि की जा सकती है। शुरुआती पहचान से इसे नियंत्रित करना आसान हो जाता है।

कैसे किया जा सकता है कंट्रोल?

दरअसल इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) को नियंत्रित करने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे में खानपान में ज्यादा शुगर और फैट वाली चीजों को कम करना चाहिए और हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन से भरपूर आहार को शामिल करना चाहिए। वहीं नियमित शारीरिक गतिविधि भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज करने से शरीर एक्टिव रहता है और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन अपनाना फायदेमंद हो सकता है। पर्याप्त नींद लेना और वजन को नियंत्रित रखना भी जरूरी होता है। वहीं समय-समय पर ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल की जांच कराना भी जरूरी माना जाता है। इन आदतों को अपनाकर इंसुलिन रजिस्टेंस (Insulin Resistance) को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और इससे जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

 

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