Defence Corridor Scam: डिफेंस कॉरिडोर घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पर ईडी चुप

पर्दे के पीछे छुपे सियासी चेहरों तक आएगी आंच, अभिषेक प्रकाश समेत डेढ़ दर्जन अफसर-कर्मी हैं दोषी

Sandesh Wahak Digital Desk: करोड़ों के डिफेंस कॉरिडोर घोटाले के दोषियों पर राजस्व विभाग ने तो कार्रवाई शुरू की है। लेकिन पीएमएलए एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नींद अभी तक नहीं टूटी है।

जबकि घोटाले में सिर्फ अफसर और कर्मचारी ही नहीं बल्कि कई सफेदपोश चेहरे भी शामिल हैं। फिर भी पीएमएलए का केस दर्ज नहीं हो सका है। लखनऊ के पूर्व डीएम अभिषेक प्रकाश समेत तकरीबन डेढ़ दर्जन अफसरों और कर्मचारियों को 58 करोड़ के घोटाले में दोषी ठहराया गया है। एक ही खरीदार ने कई फर्जी आवंटियों से जमीन अपने नाम कराई। कई चेहरे ऐसे हैं, जिनके पीछे रसूखदार सियासी लोगों ने खुद को छुपा रखा है। सूत्रों की माने तो डिफेंस कॉरिडोर के लिए सरोजनीनगर तहसील में भटगांव ग्राम पंचायत की भूमि अधिग्रहण में किए गए घोटाले के दोषियों ने कई जिलों में सम्पत्तियों का अंबार खड़ा किया है।

Corruption

बिना कब्जा ही कागजों पर भूखंडों का मालिक दिखाकर मुआवजा वितरित

भटगांव की जमीनें मुख्य रूप से वरुण मिश्रा, पत्नी सरिता सिंह, बंका और आशीष मिश्रा के नाम पर रजिस्ट्री की गयी हैं। ऐसे रसूखदार लोगों की फेहरिस्त लम्बी है। बिना कब्जा ही कागजों पर भूखंडों का मालिक दिखाकर मुआवजा वितरित कर दिया गया। फिर भी ईडी की निगाहें अभी तक इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पर नहीं पहुंची है। जबकि तत्काल प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट अर्थात ईसीआईआर दर्ज करना चाहिए। ईडी ने निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश के प्रकरण में इन्वेस्ट यूपी के दलाल निकान्त जैन की जांच शुरू की थी।

अभिषेक प्रकाश और निकान्त जैन

इसी तरह निकान्त जैन की तर्ज पर घोटाले के दोषी कानूनगो जितेंद्र सिंह के ऊपर तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश के लिए मैनेजमेंट करने के संगीन आरोप हैं। कानूनगो जितेंद्र सिंह जैसे कई भ्रष्टों की सम्पत्तियों की जांच ईडी को शुरू कर देना चाहिए था। हालांकि ईडी का पूरी तरह फोकस आईएएस अभिषेक प्रकाश पर भी नहीं है।

Vivekanand Dobriyal
विवेकानंद डोबरियाल

डोबरियाल समेत कई अफसरों से जितेंद्र का कनेक्शन

घोटाले में तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश सहित एक तत्कालीन एडीएम, चार एसडीएम, चार तहसीलदार, एक नायब तहसीलदार, तीन कानूनगो व दो लेखपाल शामिल हैं। जिस भूमाफिया ने अफसरों के साथ सांठगांठ करके पट्टे की असंक्रमणीय श्रेणी की भूमि को संक्रमणीय घोषित करवा लिया था। उसके संबंध कई बड़े अफसरों और रसूखदारों से बताये जा रहे हैं। जमीनों की हेराफेरी के कई गहरे राज ये अफसर जानते हैं। कानूनगो जितेंद्र सिंह के करीबी रिश्ते पूर्व राजस्व कर्मी विवेकानंद डोबरियाल समेत कई अफसरों से हैं। जिनके पास करोड़ों की सम्पत्तियों की फेहरिस्त बतायी जा रही है।

वसूली टेढ़ी खीर, पूर्व के अफसरों को बख्शा

भू-माफिया ने किसानों से आठ लाख में भूमि खरीद कर 54 लाख में बेची थी। गलत तरीके से मुआवजा पाने वालों से वसूली करना टेढ़ी खीर है। राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष रजनीश दुबे ने पूर्व में तैनात अफसरों की जांच करने की बात भी कही थी।

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