शिक्षा सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की बुनियाद है: सीएम योगी

Sandesh Wahak Digital Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा के भूमि पूजन और शिलान्यास समारोह में उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं देती, बल्कि यह किसी भी बच्चे के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रवाद और अपनी संस्कृति से जुड़ने की बुनियाद भी है।

सीएम योगी ने कहा कि आजादी के तुरंत बाद जब तत्कालीन सरकारें भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे पाईं, तब नानाजी देशमुख ने सरस्वती शिशु मंदिर की शुरुआत गोरखपुर से की। इसका मकसद ऐसे शिक्षण संस्थान बनाना था, जो भारत को फिर से विश्वगुरु बना सकें। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा से संस्कार, आदर्श और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव पैदा नहीं होता, तो वह केवल ‘कुशिक्षा’ है।

सरस्वती शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज का नेतृत्व कर रहे हैं

सीएम ने बताया कि जब गोरखपुर में पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित हुआ, तब केवल पाँच छात्र थे। आज इस संस्था के 12 हजार से ज्यादा विद्यालय हैं। इन संस्थानों से निकले छात्र आज समाज का नेतृत्व और मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही कोई देश समर्थ और शक्तिशाली बनता है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारतीयों को हीन और विदेशियों को बेहतर समझा जाता था। उन्होंने कहा कि भारत कभी दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था था, लेकिन अंग्रेजों ने हमें लूट लिया। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे समाज ने अपने नायकों को भुलाकर विदेशी आक्रांताओं की पूजा शुरू कर दी थी।

सीएम योगी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ की नीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हमें भारत में बने उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अगर हम विदेशी सामान खरीदते हैं, तो उसका मुनाफा आतंकवाद जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है, जैसा कि पहलगाम की आतंकी घटना में हुआ था।

टेक्नोलॉजी का सही उपयोग करें, उसके गुलाम न बनें

आज के डिजिटल युग पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने हमें आगे बढ़ाया है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर हम 4-6 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं, तो यह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि हम अपनी रचनात्मकता और समय को भी बर्बाद करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हमें टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समाज और देश के लिए करना चाहिए।

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