बहराइच में डीएम के खिलाफ फूटा कर्मचारियों का गुस्सा, ट्रांसफर या माफी की मांग पर अड़े अधिकारी

Sandesh Wahak Digital Desk: बहराइच जिले की प्रशासनिक फिजा में सोमवार को जबरदस्त हलचल देखने को मिली, जब विकास भवन परिसर में बड़ी संख्या में पंचायती राज विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इकट्ठा हो गए। नाराजगी का कारण था जिलाधिकारी मोनिका रानी का रवैया। आरोप है कि हाल ही में हुई एक बैठक के दौरान उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी से बदसलूकी की, जिससे आक्रोशित होकर कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया।

डीएम पर गंभीर आरोप

दरअसल, तीन दिन पहले कलेक्ट्रेट में विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस दौरान डीएम मोनिका रानी ने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) सर्वेश पांडेय से किसी मुद्दे पर नाराज होकर कथित तौर पर अपशब्द कहे और उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। यह देख अन्य अधिकारी, जैसे कि जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) और जिला कार्यक्रम अधिकारी, भी खुद को अपमानित महसूस करते हुए बैठक छोड़कर चले गए।

‘अब नहीं सहेंगे’: कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

इस घटनाक्रम से आहत होकर पंचायत सचिव, ग्राम विकास अधिकारी, सफाई कर्मचारी और अन्य संगठनों के बैनर तले हजारों कर्मचारी सोमवार को विकास भवन में धरने पर बैठ गए। सभी डीएम के तत्काल तबादले या सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे थे। जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन हुआ।

दो दिन चला आंदोलन, शासन ने लिया संज्ञान

मंगलवार को भी प्रदर्शन जारी रहा। इसी दौरान गोंडा मंडल के उप निदेशक पंचायत गिरीश चंद्र रजक मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन पूरे मामले को देख रहा है और एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने धरना स्थगित किया।

मुख्य सचिव ने खुद लिया मामला संज्ञान

प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार भी हरकत में आ गई है। मुख्य सचिव ने इस पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए डीपीआरओ समेत एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को लखनऊ तलब किया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों से विस्तृत वार्ता के बाद मामले की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी जाएगी।

कौन-कौन रहा शामिल?

धरने में डीपीआरओ, एडीओ पंचायत, सफाई कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष, पंचायत सचिव संघ और रोजगार सेवक संघ के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

बहराइच में इस विवाद ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। अधिकारी जहां खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं, वहीं कर्मचारी लामबंद होकर डीएम के रवैये के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। अब निगाहें शासन के उस निर्णय पर टिकी हैं, जो आने वाले हफ्ते में इस गतिरोध का समाधान देगा।

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