Mathura News: बांके बिहारी मंदिर पहुंचे एके शर्मा को झेलना पड़ा विरोध, महिलाओं ने घेरा, कहा- वापस जाओ
Sandesh Wahak Digital Desk: श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण और ट्रस्ट गठन को लेकर जारी विवाद अब सड़कों से होता हुआ मंदिर परिसर तक जा पहुंचा है। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा बांके बिहारी मंदिर पहुंचे, तो उन्हें वहां महिलाओं और गोस्वामी परिवार के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बन गए कि मंत्री को मंदिर के अंदर ठीक से दर्शन तक नहीं हो सके और उन्हें गेट नंबर 4 से बाहर निकालना पड़ा।
काली पट्टी बांधकर महिलाओं ने जताया विरोध, पुलिस पर भी लगे आरोप
मंदिर परिसर में पहले से मौजूद स्थानीय महिलाओं ने काली पट्टियां बांधकर मंत्री के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि कॉरिडोर निर्माण से मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और आस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और महिलाओं के बीच तनातनी भी देखने को मिली।
सीओ सदर संदीप सिंह द्वारा महिलाओं के हाथ से विरोध में लिखे स्लोगन छीने जाने पर एक गोस्वामी और सीओ के बीच कहासुनी हो गई। इसी बीच सेवायतों ने नाराज़गी में मंदिर का पर्दा गिरा दिया, जिससे मंत्री केवल कुछ ही सेकंड के लिए भगवान बांके बिहारी के दर्शन कर पाए।
मंत्री को नहीं मिला परंपरागत स्वागत, विरोध के बीच निकले बाहर
मंदिर की परंपरा के अनुसार दर्शन करने आए विशिष्ट अतिथियों को प्रसाद और पटका पहनाकर स्वागत किया जाता है, लेकिन इस बार मंत्री को न तो प्रसाद मिला और न ही पारंपरिक सम्मान। स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने एहतियातन मंत्री को गेट नंबर 4 से बाहर निकाल दिया।
वीआईपी रोड पर भी प्रदर्शन, महिलाओं से की मुलाकात
मंदिर से निकलने के बाद जब मंत्री शर्मा वीआईपी रोड स्थित जुगल गोस्वामी की गद्दी पर पहुंचे, वहां भी विरोध कर रही महिलाएं पहुंच गईं और दोबारा नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि इस दौरान मंत्री ने चार महिलाओं को अंदर बुलाया और उनकी बात ध्यान से सुनी। महिलाओं ने मंदिर कॉरिडोर को लेकर अपनी चिंताएं और आपत्तियां रखीं।
बातचीत के दौरान मंत्री ए.के. शर्मा ने आश्वस्त किया कि, “मैं जनता की भावनाओं का सम्मान करता हूं। किसी भी निर्णय में आम लोगों की सहमति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।”
बढ़ता जा रहा है मंदिर विवाद
गौरतलब है कि वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर को लेकर कॉरिडोर निर्माण और ट्रस्ट गठन के प्रस्ताव पर सेवायतों और स्थानीय निवासियों में लगातार विरोध देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि यह व्यवस्था उनकी पारंपरिक धार्मिक भूमिका और आस्था पर सीधा हस्तक्षेप है।
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