सिद्धार्थनगर: मझौली सागर बनेगा ‘इको-टूरिज्म’ का नया ठिकाना, हर साल आते हैं 20 हजार विदेशी मेहमान

सिद्धार्थनगर: कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र के मझौली सागर के सुरम्य तट पर सामाजिक वानिकी वन प्रभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने और संवारने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक जल निकाय नहीं, बल्कि हजारों विदेशी पक्षियों का बसेरा है।

सिद्धार्थनगर: मझौली सागर बनेगा 'इको-टूरिज्म' का नया ठिकाना

इको-टूरिज्म से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डीएफओ (DFO) नीला एम. ने कहा कि मझौली सागर पूरी तरह प्राकृतिक है और इसकी खूबसूरती यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों से बढ़ती है। उन्होंने लोगों से अपील की, “ये पक्षी हमारे मेहमान हैं, इनका शिकार न करें।” डीएफओ ने सुझाव दिया कि ‘एक जनपद, एक वेटलैंड’ योजना के तहत मझौली सागर का चयन होना चाहिए। उन्होंने बताया कि यहाँ इको-टूरिज्म की अपार संभावना है, जिससे न केवल प्रकृति का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

सिद्धार्थनगर: मझौली सागर बनेगा 'इको-टूरिज्म' का नया ठिकाना

प्रकृति के फेफड़े हैं ये वेटलैंड्स

मुख्य अतिथि और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलराम सिंह ने कहा कि वेटलैंड्स का प्रकृति में वही महत्व है जो हमारे शरीर में फेफड़ों का होता है। उन्होंने मझौली सागर के संरक्षण, संवर्धन और विकास को समय की जरूरत बताया। वहीं, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने बताया कि हर साल यहाँ लगभग 20 हजार विदेशी पक्षी प्रवास के लिए आते हैं, जो इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्ता को दर्शाते हैं।

प्रतिभाओं का सम्मान और बर्ड वाचिंग

कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

क्विज: फरहान अहमद ने बाजी मारी।

चित्रकला: साक्षी जायसवाल प्रथम रहीं।

फोटोग्राफी: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की प्रीति कुशवाहा ने पहला स्थान प्राप्त किया।

विजेताओं को सीडीओ और डीएफओ ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों और छात्रों ने दूरबीन के माध्यम से इन खूबसूरत विदेशी मेहमानों (पक्षियों) को निहारा।

क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कई वन अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

रिपोर्ट: जाकिर खान

 

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