बस में सवार हुए किन्नर, यात्रियों से जबरन वसूले पैसे, विरोध पर चालक-परिचालक को दी धमकी

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ में किन्नरों का उग्र और असामाजिक व्यवहार अब आम जनता और परिवहन कर्मचारियों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। रोडवेज बसों में जबरन चढ़कर पैसे वसूलने, धमकाने और अश्लील हरकतों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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शिकायती पत्र कार्यवाही हेतु

पूरा मामला अवध डिपो की एसी बस (UP33 AT 4029) का है, जो आलमबाग से प्रयागराज जा रही थी। बस में ड्यूटी पर तैनात त मृतक आश्रित महिला परिचालक और नियमित चालक ने अधिकारियों को लिखित शिकायत में बताया कि बस के रवाना होते ही कुछ किन्नर जबरदस्ती बस में घुस आए और यात्रियों से 50-100 रूपये तक की वसूली करने लगे।जब यात्रियों ने जब इसका विरोध किया, तो किन्नरों ने अश्लील भाषा में गाली-गलौज शुरू कर दी। बात इतनी बिगड़ गई कि महिला परिचालक और चालक को भी धमकाया गया और अश्लील हरकतों से परेशान किया गया। किन्नरों ने रोडवेज बस के शीशे तोड़ने और बस को आग लगाने की धमकी दी डाली।

यात्रियों में दहशत, बस को वापस लाना पड़ा

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जगदीश चंद्र यादव, नियमित चालक

घटना के बाद यात्रियों में भय और असहजता का माहौल बन गया। महिला परिचालक और ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को तुरंत आलमबाग पुलिस चौकी ले गए। बाद में यात्रियों को दूसरी बस से प्रयागराज रवाना किया गया।

पुलिस और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

बस स्टेशन के स्टाफ और अन्य परिवहन कर्मियों ने इस घटना के बाद पुलिस और निगम अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। मगर ये कोई पहली बार नहीं है। कैसरबाग, चारबाग और आलमबाग जैसे व्यस्त बस अड्डों पर किन्नरों की ये दबंगई कोई नई बात नहीं रह गई है।

नकली किन्नरों का गिरोह सक्रिय? 

आलमबाग बस स्टेशन प्रबंधन और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक , कई ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो हार्मोन इंजेक्शन और मेकअप के जरिए खुद को किन्नर दिखाकर वसूली करते हैं। इनका मकसद सिर्फ यात्रियों को डराकर पैसा ऐंठना होता है।

नकली किन्नर कैसे बनते हैं? डॉक्टर क्या कहते हैं?

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे लोग असली किन्नर समुदाय की छवि भी खराब कर रहे हैं। लखनऊ जैसे शहरों में हाल के वर्षों में “नकली किन्नरों” का चलन तेजी से बढ़ा है — ये वो लोग होते हैं जो जन्म से किन्नर नहीं होते, लेकिन पैसे की लालच में किन्नर समुदाय का रूप धारण कर लेते हैं। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मुताबिक, नकली किन्नर बनने की यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है:

हार्मोन थेरेपी का गलत इस्तेमाल

इन लोगों में कुछ पुरुष खुद को औरों से अलग दिखाने के लिए स्त्री हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन) का अवैध तरीके से सेवन करने लगते हैं।

  • इन हार्मोन इंजेक्शनों से शरीर में स्त्री जैसे लक्षण आने लगते हैं, जैसे –

    • छाती का उभरना

    • आवाज़ का पतला होना

    • चेहरे और शरीर की त्वचा में बदलाव

  • डॉक्टरों के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह लिए हार्मोन लेना खतरनाक होता है और यह कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है — जैसे लिवर डैमेज, हार्मोनल कैंसर, बांझपन और मानसिक असंतुलन।

कॉस्मेटिक सर्जरी और मेकअप

कुछ नकली किन्नर चेहरे और शरीर की बनावट बदलवाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी या स्थायी मेकअप का सहारा लेते हैं।

  • नकली आईब्रो, विग, स्तन प्रत्यारोपण और भारी मेकअप से वे खुद को ‘किन्नर’ के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

  • इससे वे बसों, ट्रेनों, शादी-विवाह या सिग्नल पर लोगों से पैसे मांगने का काम करते हैं।

मानसिक और सामाजिक प्रभाव

  • डॉक्टरों का कहना है कि ये लोग न तो किन्नर समुदाय के हैं और न ही उनका कोई सांस्कृतिक या सामाजिक जुड़ाव होता है।

  • ये केवल लोगों की शर्म और सामाजिक डर का फायदा उठाकर पैसे ऐंठते हैं।

  • इससे असली किन्नर समुदाय की छवि भी धूमिल होती है, जिन्हें समाज पहले से ही हाशिए पर रखता है।

अब सवाल ये है कि लखनऊ प्रशासन के पास कितने रजिस्टर्ड किन्नरों की सूची है? क्या पुलिस और परिवहन विभाग के पास ऐसे मामलों से निपटने की कोई ठोस योजना है? महिला कर्मियों की सुरक्षा का जिम्मा किसका है?

लखनऊ जैसे संवेदनशील और बड़े शहर में यदि सार्वजनिक परिवहन में ही लोग असुरक्षित महसूस करने लगें, तो ये बेहद चिंता का विषय है। महिला कर्मचारी, यात्रियों और समाज की गरिमा की रक्षा के लिए जल्द ही प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी होगी, वरना रोडवेज बसें असुरक्षा और डर का पर्याय बन जाएंगी।

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