Deoria News: पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गुपचुप तरीके से देवरिया जेल से रिहा, धोखधड़ी के आरोप में थे बंद

Deoria News: पिछले दो महीनों से देवरिया जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर बुधवार देर शाम रिहा हो गए। जेल प्रशासन को रिहाई का परवाना मिलते ही उन्हें छोड़ दिया गया, जिसके बाद वह अपने परिजनों के साथ चुपचाप शहर से रवाना हो गए। उनकी रिहाई इतनी गुपचुप रही कि जेल के बाहर खड़े लोगों और पुलिसकर्मियों को भी पता नहीं चला कि वह कब बाहर निकल गए।

अमिताभ ठाकुर पर करीब 25 साल पुराने एक प्लॉट आवंटन मामले में धोखाधड़ी का आरोप है। साल 1999 में जब वह देवरिया के एसपी थे, तब उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर एक प्लॉट आवंटित हुआ था। आरोप है कि दस्तावेजों में नाम गलत दर्ज थे (अमिताभ की जगह अजिताभ और नूतन की जगह नूतन देवी)। इसी मामले में सितंबर 2025 में लखनऊ में केस दर्ज हुआ और एसआईटी जांच शुरू हुई। 9 दिसंबर को दिल्ली जाते समय उन्हें शाहजहांपुर से गिरफ्तार किया गया था।

जनवरी में ही उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन कानूनी पेच के कारण वह बाहर नहीं आ पा रहे थे। दरअसल, उनका केस लखनऊ के तालकटोरा थाने से गोमतीनगर थाने ट्रांसफर हो गया था। गोमतीनगर पुलिस ने जेल में ‘वारंट बी’ तामील करा दिया, जिससे उनकी रिहाई रुक गई। हाल ही में लखनऊ कोर्ट ने इस वारंट को रद्द किया, जिससे उनके बाहर आने का रास्ता साफ हुआ।

जेल में भी चर्चा में रहे अमिताभ

अपनी कार्यशैली के लिए मशहूर अमिताभ ठाकुर जेल के भीतर भी सुर्खियों में बने रहे।

अनशन: गिरफ्तारी के वक्त जब्त किए गए सामान की वापसी के लिए उन्होंने जेल में आमरण अनशन किया था।

धमकी भरा पत्र: उन्होंने दावा किया था कि उनके बैरक के पास एक धमकी भरा पत्र मिला है, जिसमें उन्हें जान से मारने की बात कही गई थी।

कफ सिरप कांड: उन्होंने जेल से ही बयान दिया था कि उनके पास कोडीन कफ सिरप घोटाले से जुड़े बड़े नेताओं के खिलाफ अहम सबूत हैं और इसीलिए सरकार ने उन्हें जेल में डाल रखा है।

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