फर्जी दस्तावेज, नकली मुहरें…, जालसाज गैंग का UP STF ने किया पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने फर्जीवाड़े और साइबर ठगी से जुड़े एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो सरकारी अफसरों के नाम पर ईमेल भेजकर शिक्षक और शिक्षा विभाग से जुड़ी गोपनीय जानकारियां जुटाता था और फिर उन्हीं से मोटी रकम ऐंठता था। इस हाई-टेक जालसाजी में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

फर्जी नोटिस और फर्जी दस्तखत से चलता था पूरा खेल

गिरफ्तार आरोपियों में पहला नाम बजरंगी लाल गुप्ता का है, जो प्रयागराज का निवासी है और खुद को कभी शिक्षक बता चुका है। दूसरा आरोपी जयप्रकाश तिवारी फतेहपुर जिले का रहने वाला है। ये दोनों मिलकर फर्जी ईमेल आईडी बनाते थे और फिर खुद को एसटीएफ या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर बीएसए (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी), डीआईओएस (जिला विद्यालय निरीक्षक) और अन्य परीक्षा नियंत्रकों को फर्जी नोटिस भेजते थे।

इन नोटिसों में शिक्षकों की गोपनीय जानकारी मांगी जाती थी और फिर संबंधित शिक्षकों से सीधे या परोक्ष रूप से वसूली की जाती थी।

पकड़े गए आरोपियों के पास से मिली ये चीजें

  • तीन फर्जी मोहरे
  • दो मोबाइल फोन
  • एक टैबलेट
  • कई फर्जी दस्तावेज जिन पर अधिकारियों के नकली हस्ताक्षर मौजूद थे

कैसे हुआ खुलासा?

एसटीएफ की नोएडा यूनिट को सूचना मिली कि कौशाम्बी जिले के डीआईओएस को एक फर्जी ईमेल मिला है, जिसमें कुछ शिक्षकों की गोपनीय जानकारी मांगी गई थी और बार-बार फोन करके दबाव भी बनाया जा रहा था।

सूचना पुख्ता होते ही निरीक्षक सचिन कुमार और उप निरीक्षक सनत कुमार की टीम ने मौके पर जांच की। छानबीन के बाद दोनों आरोपियों को प्रयागराज के फाफामऊ क्षेत्र से पूछताछ के लिए उठाया गया और बाद में कौशाम्बी के मंझनपुर थाना में देर शाम गिरफ्तार कर लिया गया।

पुराना अपराधी निकला बजरंगी लाल

पूछताछ में खुलासा हुआ कि बजरंगी लाल पहले एक शिक्षक था, लेकिन फर्जी मार्कशीट के चलते उसे बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उसने जालसाजी का रास्ता पकड़ लिया। उसने खुद स्वीकार किया कि 2016-17 में शिक्षक भर्ती में 17 लोगों से पैसे लेकर फर्जी नियुक्तियां कराईं। इसके लिए उस पर झांसी, प्रतापगढ़, भदोही और कौशाम्बी सहित कई जिलों में मुकदमे दर्ज हैं। बजरंगी लाल ने बताया कि वह फर्जी नोटिस तैयार करवाने के लिए जयप्रकाश की मदद लेता था, जो फर्जी दस्तावेज और सरकारी मुहरें बनाता था।

चार शिक्षकों को फर्जी दस्तावेजों से बहाल कराने की साजिश

एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपियों ने पहले से बर्खास्त चार शिक्षकों धीरेन्द्र कुमार सिंह, जितेन्द्र कुमार, अरविन्द कुमार और मोहम्मद इदरीश के लिए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाया था, ताकि उनकी बर्खास्तगी को वापस लिया जा सके।

जयप्रकाश का सरकारी दफ्तरों से पुराना जुड़ाव

जयप्रकाश तिवारी ने कबूला कि उसके पिता फतेहपुर बीएसए कार्यालय में ड्राइवर थे और इसी कारण वह कार्यालय से जुड़ा रहा। बाद में राजेश तिवारी नाम के एक बाबू के साथ टाइपिंग करने लगा और यहीं उसकी मुलाकात बजरंगी लाल से हुई, जिसके बाद वह पूरी तरह इस गोरखधंधे में शामिल हो गया।

फिलहाल थाना मंझनपुर (जनपद कौशाम्बी) में आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों से पूछताछ के बाद अब अन्य संभावित पीड़ितों और संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है।

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