बिजनौर में ‘फर्जी’ IB डिप्टी डायरेक्टर गिरफ्तार, NSA का नकली कार्ड दिखाकर करता था वसूली

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने बिजनौर में एक ऐसे हाई-प्रोफाइल जालसाज को बेनकाब किया है, जो ‘डिप्टी डायरेक्टर’ का मुखौटा पहनकर सरकारी तंत्र को अपनी उंगलियों पर नचा रहा था। खुद को देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी का आला अफसर बताने वाला यह शख्स असल में एक मेडिकल स्टोर संचालक निकला।

आरोपी मनोज चौहान खुद को दिल्ली में तैनात आईबी का डिप्टी डायरेक्टर बताकर न केवल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाता था, बल्कि जनता के काम कराने के नाम पर अवैध वसूली भी करता था।

ऐसे हुआ ‘मिशन फर्जी डायरेक्टर’ का खुलासा

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति विभिन्न मोबाइल नंबरों से अफसरों को फोन कर खुद को वरिष्ठ खुफिया अधिकारी बताकर धौंस जमा रहा है। एएसपी बृजेश कुमार सिंह के निर्देशन में इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार की टीम ने जाल बिछाया। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे एसटीएफ ने धामपुर की साकेत विहार कॉलोनी में गुलमोहर रिसोर्ट के पास से मनोज चौहान को गिरफ्तार कर लिया।

बरामदगी

01 फर्जी परिचय पत्र: डिप्टी डायरेक्टर, NSA (National Security Agency) इंडिया के नाम पर।

01 सफेद इग्निस कार: (नंबर UP-20 CH-6789), जिसका इस्तेमाल वह रौब झाड़ने के लिए करता था।

02 मोबाइल फोन: जिनसे वह अधिकारियों को कॉल करता था।

एमएससी पास ‘फार्मेसिस्ट’ कैसे बना ‘जालसाज’?

पूछताछ में मनोज चौहान ने बताया कि वह एमएससी पास है और अपनी पत्नी के नाम पर ‘अपोलो मेडिकल एजेंसी’ नाम की फार्मेसी चलाता है। जालसाजी की शुरुआत उसके पारिवारिक स्कूल विवाद से हुई। गांव के स्कूल में अपने पिता को मैनेजर बनवाने के बाद उसने गांव वालों में पैठ बनाने के लिए झूठ फैला दिया कि उसकी नौकरी दिल्ली आईबी में लग गई है।

धौंस और सिफारिश का खेल

आरोपी ने अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) का फर्जी कार्ड भी बना लिया था। वह बिजनौर और आसपास के जिलों के शिक्षा, राजस्व, न्याय और पुलिस विभाग के अफसरों को फोन कर सिफारिशें करता था। लोग उसे असली अधिकारी समझकर उसके झांसे में आ जाते थे, जिसका फायदा उठाकर वह अवैध धन की उगाही करता था।

कानूनी कार्रवाई

अभियुक्त के खिलाफ थाना धामपुर में बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं (धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि उसने अब तक कितने लोगों से और कितनी राशि की ठगी की है।

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