Lucknow News: एसटीएफ ने फर्जी लोन रैकेट का किया भंडाफोड़, यूनियन बैंक के मैनेजर सहित चार गिरफ्तार

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक मैनेजर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके मुद्रा और ऑटो लोन जैसे फर्जी लोन पास कराता था।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गौरव सिंह (यूनियन बैंक के मैनेजर और मास्टरमाइंड), नावेद हसन, अखिलेश तिवारी और इंद्रजीत सिंह के रूप में हुई है। एसटीएफ ने इनके पास से 5 मोबाइल फोन, एक डेस्कटॉप, जाली आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, और 268 लोन से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा, गिरोह की कमाई से खरीदी गई एक बीएमडब्ल्यू समेत चार महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।

Lucknow cyber fraud

कैसे चलता था ये फर्जीवाड़ा

एसटीएफ के अनुसार, इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित राज बहादुर गुरुंग ने शिकायत दर्ज कराई। राज बहादुर ने बताया कि उसे लोन की जरूरत थी और वह इंद्रजीत सिंह के जरिए नावेद हसन और बैंक मैनेजर गौरव सिंह से मिला। आरोपियों ने राज बहादुर से उसके आधार और पैन कार्ड लिए और बैंक में कई दस्तावेजों पर दस्तखत करा लिए।

राज बहादुर को बताया गया कि उसका लोन पास नहीं हुआ, लेकिन कुछ महीनों बाद उसे EMI का मैसेज आने लगा। जब उसने अपना सिबिल स्कोर चेक किया तो पता चला कि उसके नाम से 9.80 लाख रुपये का मुद्रा लोन और 15 लाख रुपये का कार लोन पास हो चुका है।

जांच में पता चला कि ये सभी आरोपी एक संगठित गिरोह चला रहे थे। पूछताछ में नावेद हसन ने बताया कि वे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बैंकों से अब तक करीब 20 गाड़ियों को फाइनेंस करा चुके हैं और 20 लोगों के नाम पर मुद्रा लोन पास करा चुके हैं।

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बैंक मैनेजर ने किया गुनाह कुबूल

बैंक मैनेजर गौरव सिंह ने भी अपना गुनाह कुबूल करते हुए बताया कि वह पैसे के लालच में इस गिरोह में शामिल हुआ था। वे लोगों से लोन के लिए कागजात लेकर उन पर दस्तखत करवा लेते थे और फिर जाली फर्मों के खातों में लोन का पैसा ट्रांसफर कर लेते थे। ये खाते उन्होंने खुद बनाए थे। गौरव सिंह ने फर्जी लोन पास करने के लिए अपने सहायक मैनेजरों की आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल भी किया था।

एसटीएफ की शुरुआती जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया है। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर लिया है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

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