दिल्ली प्रदूषण पर पूर्व CJI की टिप्पणी, पटाखों पर छूट को बताया व्यावहारिक फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली में प्रदूषण (Delhi Pollution) के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स 600 के पार पहुंच चुका है, जिससे सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। पिछले करीब दो महीनों से दिल्ली की हवा बेहद खराब बनी हुई है और लोग आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस बीच कुछ लोगों ने इस साल दिवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर दी गई छूट को हवा की खराब स्थिति की एक बड़ी वजह बताया है।
पटाखों पर छूट को लेकर बोले पूर्व CJI
दरअसल पटाखों को लेकर छूट देने का फैसला पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने किया था। एक पत्रकार के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोर्ट इस मुद्दे पर एक दशक से ज्यादा समय से नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि साल 2020 में तीन जजों की बेंच ने सभी रिपोर्ट और पहलुओं पर विचार करने के बाद पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी, जबकि एक साल बाद दो जजों की बेंच ने पूरी तरह से बैन लगा दिया। उनके अनुसार अदालत के आदेश केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद लुटियंस ज़ोन में रहते हैं और पूरी तरह बैन के बावजूद पटाखों का शोर सुनाई देता था। इसी वजह से केंद्र सरकार और यूनियन ऑफ इंडिया की अपील पर ट्रायल के तौर पर दो दिनों की छूट दी गई और AQI लेवल की स्टडी करने के निर्देश भी दिए गए।
दिवाली के बाद तेजी से बिगड़े हालत
इस साल दिवाली के अगले ही दिन दिल्ली में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ गया। हवा में मौजूद बेहद नुकसानदायक कण PM2.5 का औसत स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, जो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा तय सुरक्षित सीमा से लगभग 100 गुना ज्यादा था। यह स्तर दिवाली से पहले की तुलना में 212 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बाद से ही यह बहस तेज हो गई कि क्या पटाखों पर दी गई दो दिनों की छूट ने दिल्ली की हवा को और ज्यादा जहरीला बना दिया।
दिल्ली में लागू हुआ GRAP-4
दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके तहत राजधानी में सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। सरकार ने 10वीं और 12वीं कक्षा को छोड़कर बाकी सभी कक्षाओं के लिए फिजिकल क्लास बंद करने के निर्देश दिए हैं और ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प अपनाया जा सकता है। इसके अलावा आवश्यक सेवाओं और जरूरी सामान ले जाने वाले CNG और इलेक्ट्रिक ट्रकों को छोड़कर बाकी ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है। बढ़ते प्रदूषण ने एक बार फिर दिल्ली में पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
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