सिद्धार्थनगर: पूर्व विधायक डुमरियागंज बोले- मैं अपने बयान पर कायम हूं; वीडियो जारी कर कही ये बात
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर डुमरियागंज में राप्ती तट पर 2 दिवसीय आयोजित हुए “राम-राम कुश्ती दंगल” के दौरान दिए गए अल्पसंख्य सूचक आपत्तिजनक बयान को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
20 जनवरी को जारी अपने वीडियो बयान में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने पूर्व के बयान से न तो इनकार करते हैं और न ही पीछे हटते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि वह आज भी अपने बयान पर कायम हैं। वीडियो सामने आते ही मामला और ज्यादा गरमा गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
अपने वीडियो संदेश में राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि वर्ष 2024 में भगवान श्रीराम के मंदिर की स्थापना के बाद ‘राम-राम कुश्ती दंगल’ की शुरुआत की गई थी। उन्होंने बताया कि उस समय भी कुछ मुस्लिम पहलवान दंगल में आए थे। अखाड़े में बजरंगबली की विधिवत पूजा होती है और हर वर्ष 35 से 50 पहलवान इसमें हिस्सा लेते हैं।
पूर्व विधायक के अनुसार, पहले मुस्लिम पहलवानों की ओर से मांस-मछली खाने की मांग की गई थी। इसी के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि राम-राम अखाड़े में आगे से मुस्लिम पहलवानों को कुश्ती लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
18 जनवरी के विवाद को बताया ‘प्रायोजित साजिश’
राघवेंद्र प्रताप सिंह ने 18 जनवरी को हुए विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन 4 से 5 पहलवानों के बीच झगड़ा हुआ, जो उन्हें एक प्रायोजित साजिश जैसा लगा। इसी दौरान उन्हें बताया गया कि एक पहलवान मुसलमान है। उन्होंने कहा कि जब पहले ही मुस्लिम पहलवानों के आने पर प्रतिबंध लगाया जा चुका था, तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि वह अखाड़े में कैसे पहुंच गया। इसी बात को लेकर उन्होंने मंच से “खतना चेक” करने की बात कही थी।

जहां-जहां मुस्लिम समुदाय जाता है, वहां विवाद होता है
वीडियो बयान में पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि उनके अनुभव के अनुसार, जहां-जहां मुस्लिम समुदाय जाता है, वहां विवाद होता है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 के दंगल में भी विवाद हुआ था और इस बार भी विवाद का कारण वही बने। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं और अगले साल भी राम-राम कुश्ती दंगल में किसी भी मुस्लिम पहलवान को कुश्ती लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मांस खाने वालों को राम-राम दंगल में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
डुमरियागंज में धर्म रक्षा मंच के बैनर तले राप्ती नदी के तट पर स्थित परशुराम वाटिका में राम-राम कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। इस दंगल के अध्यक्ष पप्पू श्रीवास्तव हैं, जबकि संरक्षक स्वयं राघवेंद्र प्रताप सिंह हैं। दंगल का शुभारंभ17 जनवरी को हुआ था।
अखाड़े में कैसे भड़का विवाद
18 जनवरी को अखाड़े में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब शास्त्री पहलवान और थापा पहलवान के बीच झगड़ा हो गया। दोनों ने एक-दूसरे पर बेइमानी के आरोप लगाए। देखते ही देखते अन्य पहलवान भी अखाड़े में चढ़ आए और माहौल बिगड़ गया। कुछ ही देर में मारपीट शुरू हो गई।

हंगामे के बीच मंच से दिया गया विवादित बयान
अखाड़े में बढ़ते हंगामे को देखते हुए पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने मंच से माइक संभाला और पहलवानों को शांत कराने की कोशिश की। जब पहलवानों ने उनकी बात नहीं मानी, तो वे नाराज हो गए। उन्होंने मंच से शास्त्री पहलवान को बुलाया और फिर सवाल किया कि कौन मुसलमान है। इसके बाद उन्होंने पहलवानों का “खतना चेक” कराने जैसी आपत्तिजनक टिप्पणी की। मंच पर मौजूद डुमरियागंज थाना प्रभारी श्री प्रकाश यादव और उनके प्रतिनिधि लवकुश ओझा को माइक से तीन बार यह कहते सुना गया कि पहलवानों का खतना चेक कराया जाए। सैकड़ों दर्शकों के सामने दिए गए इस बयान से लोग स्तब्ध रह गए।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। फेसबुक, एक्स और व्हाट्सऐप ग्रुपों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने इसे एक विशेष समुदाय का अपमान बताते हुए सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान करार दिया। लोगों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग भी की है।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं राघवेंद्र प्रताप सिंह
यह पहली बार नहीं है जब राघवेंद्र प्रताप सिंह विवादों में आए हों। इससे पहले 16 अक्टूबर को डुमरियागंज के धनखरपुर गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनका “10 मुस्लिम लड़की लो, नौकरी हम देंगे” वाला बयान भी सियासी तूफान का कारण बना था। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने उस बयान की कड़ी निंदा की थी।

विदेश के पहलवानों ने लिया हिस्सा
राम-राम कुश्ती दंगल में देश और विदेश के पहलवानों ने हिस्सा लिया। नेपाल और भूटान के अलावा राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और केरल समेत कई राज्यों के पहलवान अखाड़े में उतरे। इस दंगल में 56 से अधिक पहलवानों ने भाग लिया और 1100 रुपये से लेकर 21 हजार रुपये तक की इनामी 72 से अधिक कुश्तियां कराई गईं।
18 जनवरी को हुए फाइनल मुकाबले में राजस्थान के नरेश पहलवान ने उत्तर प्रदेश के सर्वेश तिवारी को हराकर ‘राम-राम केसरी’ का खिताब जीता। विजेता को 21 हजार रुपये नकद, गदा और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
रिपोर्ट: जाकिर खान
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