वाराणसी कोर्ट से अमिताभ ठाकुर को मिली जमानत, लेकिन अभी देवरिया जेल में ही रहना होगा
Varanasi News: वाराणसी के जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने शुक्रवार को पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जमानत याचिका मंजूर कर ली। यह मामला हिंदू युवा वाहिनी के नेता की शिकायत पर दर्ज की गई एक एफआईआर से जुड़ा था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
पूरा मामला 30 नवंबर, 2024 की एक पोस्ट से शुरू हुआ था। अमिताभ ठाकुर ने अपने ‘X’ (ट्विटर) हैंडल पर कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर एक मुद्दा उठाया था। वाराणसी के हिंदू युवा वाहिनी नेता अम्बरीष सिंह ‘भोला’ ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उनका कहना था कि अमिताभ ठाकुर ने बिना किसी ठोस सबूत के उन पर झूठे आरोप लगाए हैं और उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाया है। इसी शिकायत पर 9 दिसंबर को वाराणसी के चौक थाने में अमिताभ ठाकुर के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
जांच की मांग करना अपराध नहीं
सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर के वकील अनुज यादव ने अदालत के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, उनके मुवक्किल का मकसद किसी की मानहानि करना नहीं था। एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष और पूर्व पुलिस अधिकारी होने के नाते, उन्होंने केवल जनहित में कफ सिरप के संदिग्ध कारोबार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। किसी मुद्दे की निष्पक्ष जांच की मांग करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, इसे व्यक्तिगत हमला नहीं माना जाना चाहिए।
अदालत ने वाराणसी मामले में तो उन्हें जमानत दे दी है, लेकिन अमिताभ ठाकुर अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इसकी वजह यह है कि वे देवरिया जमीन धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में भी आरोपी हैं और फिलहाल देवरिया जेल में बंद हैं। जब तक उन्हें उस मामले में जमानत नहीं मिल जाती, तब तक उन्हें सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
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