अभ्युदय योजना में फर्जीवाड़ा: अयोग्य अभ्यर्थियों को बनाया ‘कोर्स कोआर्डिनेटर’, 6 अफसर रडार पर
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ में एक बड़े भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस कोचिंग योजना में कोर्स कोआर्डिनेटरों की नियुक्ति में नियमों को ताक पर रखकर अपात्रों को नौकरियां दी गईं। जांच में सामने आया है कि जालसाजी को छिपाने के लिए अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से सत्यापन (Verification) कराने वाली फाइल को पिछले दो वर्षों से दबा रखा था।
घोटाले की मुख्य बातें: नियमों की धज्जियां उड़ीं
कुल 69 कोर्स कोआर्डिनेटरों में से 48 अभ्यर्थी अयोग्य पाए गए हैं। नियमानुसार केवल वही अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र थे जिन्होंने PCS मुख्य परीक्षा पास की हो। लेकिन सांठगांठ के चलते ऐसे लोगों को भर्ती कर लिया गया जो यह योग्यता नहीं रखते थे।
आउटसोर्सिंग कंपनी ने सत्यापन के लिए UPPSC को पत्र लिखा, जिसे आयोग ने यह कहकर लौटा दिया कि वे किसी निजी कंपनी को डेटा नहीं दे सकते। विभाग को स्वयं पत्र भेजना था, लेकिन अफसरों ने फाइल ही गायब कर दी। इस भर्ती में साक्षात्कार (Interview) हुआ ही नहीं या उसके साक्ष्य मिटा दिए गए हैं, क्योंकि विभाग के पास इंटरव्यू से संबंधित कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
घेरे में आए अधिकारी
इस भर्ती के लिए गठित दो कमेटियों के 6 अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। इनमें शामिल प्रमुख नाम हैं।
- एस.के. विसेन (संयुक्त निदेशक)
- अनामिका सिंह (जिला समाज कल्याण अधिकारी)
- शिवम सागर (जिला समाज कल्याण अधिकारी)
- आर.के. सिंह (सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक)
- पवन यादव (जिला समाज कल्याण अधिकारी)
- नदीम सिद्दीकी (जिला समाज कल्याण अधिकारी)
आउटसोर्सिंग कंपनी की भूमिका
भर्ती प्रक्रिया अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड नामक आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए की गई थी। कंपनी और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस फर्जीवाड़े ने प्रदेश की शिक्षा और पारदर्शी भर्ती नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में जांच जारी है और दोषियों पर सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
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