आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, प्रयागराज से मास्टरमाइंड समेत दो गिरफ्तार, UP STF ने की कार्रवाई

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को प्रयागराज के नवाबगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। ये गिरोह कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सैकड़ों अपात्र व्यक्तियों के नाम पर आयुष्मान भारत योजना के फर्जी कार्ड बना रहा था। इस जालसाजी में शामिल दो मुख्य अभियुक्त गिरोह का मास्टरमाइंड अमित पांडेय और उसका सहयोगी बृजभुवन पटेल को रंगे हाथों पकड़ा गया। शातिरों को प्रयागराज के नवाबगंज बाइपास के पास से गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

  • अमित पांडेय (28 वर्ष)
  • बृजभुवन पटेल (48 वर्ष)

बरामद सामग्रियाँ

  • 02 मोबाइल फोन
  • 84 फर्जी व कूटरचित आयुष्मान कार्ड
  • 112 डेटा वर्क (आयुष्मान कार्ड से संबंधित)
  • 284 व्हाट्सएप चैटिंग के स्क्रीनशॉट
  • 01 एटीएम कार्ड
  • 01 आधार कार्ड
  • 01 पैन कार्ड
  • प्रार्ची हॉस्पिटल प्रयागराज का आईडी कार्ड
  • ₹690 नकद

जालसाजी का खुलासा कैसे हुआ?

STF को कई महीनों से सूचनाएँ मिल रही थीं कि फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए अपात्र लोगों के नाम पर आयुष्मान कार्ड बनाकर उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। STF के साइबर सेल की टीम, अपर पुलिस अधीक्षक श्री विशाल विक्रम सिंह के नेतृत्व में सक्रिय हुई। तकनीकी विश्लेषण, मुखबिरों से मिली सूचना और डिजिटल ट्रेसिंग के आधार पर 17 जून को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार मास्टरमाइंड ने क्या बताया?

अमित पांडेय ने पूछताछ में बताया कि उसने 2020-21 में Digital India Aatma Nirbhar Scheme (DIAS) के तहत CSC (जन सेवा केंद्र) का लाइसेंस लिया था। 2021-22 में वैध आयुष्मान कार्ड बनाए, लेकिन 2022 में उसकी CSC ID बंद हो गई। इसके बाद, उसने सुनित मंडल (पटना, बिहार) नामक व्यक्ति से फेसबुक के ज़रिए संपर्क किया, जो फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाने में माहिर था।  सुनित हर कार्ड के बदले ₹3,500-5,000 लेता था और अपात्र व्यक्तियों को वैध परिवार में जोड़कर कार्ड बना देता था। अमित ने बताया कि अब तक करीब 200 फर्जी कार्ड वह सुनित मंडल के जरिए बनवा चुका है। ये कार्ड वह यूपी के कई जिलों में बिचौलियों के ज़रिए बेचता था, प्रति कार्ड ₹12,000-15,000 में।

बृजभुवन का कबूलनामा

बृजभुवन पटेल ने कहा कि वह अमित के कहने पर अपात्र लोगों से आधार कार्ड और पैसे एकत्र करता था। सुनित मंडल की मदद से कार्ड बनवाकर उन्हें पहुँचाया जाता, जिससे इलाज भी करवाया जाता था। इस अवैध धंधे से उन्होंने अच्छा खासा पैसा कमाया। अब तक लगभग 200 अपात्र लोगों को फर्जी आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके ज़रिए वे इलाज करवा चुके हैं इससे सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है।

आरोपियों के खिलाफ थाना नवाबगंज, प्रयागराज में एफआईआर संख्या 279/2025 दर्ज कराई गई है, जिसमें बीएनएस की धारा 3(5), 61(2), 318, 319, 338, 336(3), 340(2) और आईटी एक्ट की धाराएँ 66C, 66D लगाई गई हैं। STF अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। बरामद डिजिटल उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।

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